ममता बनर्जी को बड़ा झटका: 19 सांसदों की बगावत से टीएमसी में दो फाड़, पहली बार बने 10 सांसद भी बागी
News Image

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने 28 साल के इतिहास के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। ममता बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ पार्टी के भीतर असंतोष अब खुली बगावत में बदल चुका है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद शुरू हुई यह हलचल अब लोकसभा तक पहुंच गई है।

19 सांसदों का पत्र बम, मचा हड़कंप

राजनीतिक गलियारों में भूचाल तब आया जब लोकसभा स्पीकर को भेजा गया 18 मई 2026 का एक पत्र सार्वजनिक हुआ। इस पत्र पर पार्टी के 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसमें उन्होंने संसद में एक अलग समूह के रूप में कार्य करने की इच्छा जताई है। बागी गुट का दावा है कि वे ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं।

ममता के भरोसेमंद ही बने बागी

ममता बनर्जी ने जिन्हें राजनीति में बड़ा चेहरा बनाया, वही आज उनके खिलाफ खड़े हैं। बगावत करने वाले 19 सांसदों में से 10 ऐसे हैं जो इसी बार पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। इनमें सायोनी घोष, यूसुफ पठान, रचना बनर्जी और जून मालिया जैसे चर्चित नाम शामिल हैं।

बागी गुट में शामिल पहली बार के 10 सांसद:

इनके अलावा काकोली घोष दस्तिदार, शताब्दी रॉय और प्रसून बंद्योपाध्याय जैसे वरिष्ठ नेता भी बागी खेमे का हिस्सा हैं।

क्या बंगाल में दोहराया जाएगा महाराष्ट्र मॉडल ?

संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद या विधायक टूटते हैं, तो उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं होता। टीएमसी के मामले में बागी गुट के पास लोकसभा और विधानसभा दोनों में दो-तिहाई से अधिक का आंकड़ा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति 2022 के महाराष्ट्र संकट जैसा मोड़ ले सकती है, जहाँ एकनाथ शिंदे गुट ने चुनाव चिह्न पर अपना दावा ठोक दिया था। अब बंगाल के ये बागी सांसद भी जोड़ा फूल चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश करने की तैयारी में हैं।

वफादारों का आरोप- सब कुछ भाजपा की साजिश

इधर, ममता बनर्जी के खेमे ने इसे गहरी साजिश करार दिया है। टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि बागी सांसदों को डरा-धमकाकर और उनके परिवारों को निशाना बनाकर साइन करवाए गए हैं। कीर्ति आजाद ने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम की स्क्रिप्ट दिल्ली में रची जा रही है।

दूसरी ओर, बागी गुट ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उनका इरादा एनडीए (NDA) में शामिल होने का नहीं है, बल्कि वे संसद में एक स्वतंत्र गुट के रूप में रहकर बंगाल के हितों और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर काम करना चाहते हैं।

टीएमसी का सिमटता कुनबा

ममता बनर्जी की राजनीतिक जमीन तेजी से खिसक रही है। लोकसभा में 28 में से 19 सांसद बागी हो चुके हैं। राज्यसभा में भी पिछले कुछ दिनों में 4 बड़े सदस्यों ने इस्तीफा दिया है। विधानसभा में भी स्थिति गंभीर है, जहाँ 80 में से 58 विधायक पहले ही अलग गुट बना चुके हैं। अब सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष और चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं, जो पार्टी का भविष्य तय करेंगे।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

ओमान तट पर भारतीय जहाजों पर हमले: भारत ने अमेरिकी राजनयिक को किया तलब, सख्त लहजे में जताई नाराजगी

Story 1

हरिद्वार में फिल्म शूटिंग का विरोध: इमरान हाशमी के सेट पर बार शब्द को लेकर मचा बवाल

Story 1

टीएमसी में अभिषेक बनाम कल्याण की जंग: ममता के सामने खड़ा हुआ अस्तित्व का संकट

Story 1

टीएमसी में बड़े सियासी भूचाल के संकेत: 19 बागी सांसदों की लिस्ट जारी, शत्रुघ्न सिन्हा का नाम गायब

Story 1

US-Iran Peace Deal: ट्रंप का दावा या ईरान का माइंड गेम ? पर्दे के पीछे का वो कड़वा सच

Story 1

Samsung Galaxy S25 यूज़र्स के लिए बड़ी खुशखबरी: अब फोन में मिलेंगे नए कमाल के AI फीचर्स

Story 1

IIT कानपुर का तोहफा: बिना JEE Advanced के करें साइबर सिक्योरिटी में 4 साल की डिग्री

Story 1

ऐसा लगता है, वो अभी दरवाजा खोलकर आएगा... , अहमदाबाद प्लेन क्रैश के एक साल बाद भी नहीं भरा अपनों का घाव

Story 1

खाड़ी देशों के CBSE छात्रों के लिए बड़ी राहत: रिजल्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये बड़ा निर्देश

Story 1

शूटिंग जगत को बड़ा झटका: दिग्गज कोच और एशियाई खेलों के गोल्ड मेडलिस्ट जसपाल राणा का 49 साल की उम्र में निधन