US-Iran Peace Deal: ट्रंप का दावा या ईरान का माइंड गेम ? पर्दे के पीछे का वो कड़वा सच
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मध्य-पूर्व के तनावपूर्ण माहौल के बीच अचानक छाई शांति की खबरों ने दुनिया को सकते में डाल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म हो गया है और एक ऐतिहासिक शांति समझौता अंतिम चरण में है। लेकिन तेहरान के पलटवार ने इस पूरी कहानी को एक उलझे हुए सस्पेंस में बदल दिया है।

ओवल ऑफिस से आया चौंकाने वाला दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस से ऐलान किया कि इस सप्ताहांत (वीकेंड) तक यूरोप में ईरान के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप के अनुसार, इस समझौते पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सहमति मिल चुकी है। ट्रंप ने इसे परमाणु मुक्त भविष्य की सबसे बड़ी जीत करार दिया है।

ईरान की रेड लाइन्स : क्या ट्रंप का दावा कोरी अटकलें हैं?

ट्रंप के दावों के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि कोई समझौता नहीं हुआ है। तेहरान ने अपनी शर्तें सामने रखी हैं: होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण, 24 अरब डॉलर की रुकी हुई संपत्ति की बहाली, और परमाणु कार्यक्रम पर कोई भी कठोर कटौती स्वीकार न करना।

खार्ग द्वीप और सैन्य दबाव का सीक्रेट चैप्टर

इस समझौते के पीछे एक खौफनाक सैन्य पृष्ठभूमि है। हाल ही में ट्रंप ने ईरान के तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर हमले की खुली धमकी दी थी। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका के कड़े सैन्य रुख और दबाव के आगे ईरान घुटनों पर आ गया। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि यह ईरान की ओर से समय खरीदने की एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल (माइंड गेम) हो सकती है।

इजराइल की शर्तें और 6 देशों का गुप्त गठबंधन

इस सीक्रेट डील में इजराइल की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। ट्रंप ने नेतन्याहू को भरोसा दिलाया है कि इस समझौते में ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को नष्ट करना और मिसाइल प्रोग्राम पर सख्त सीमाएं लगाना शामिल होगा। इसके अलावा, ट्रंप ने कतर, यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के साथ इस मुद्दे पर गुप्त परामर्श किया है।

क्या यह शांति है या महायुद्ध की आहट?

फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक है। एक तरफ ट्रंप अपनी कूटनीतिक जीत का परचम लहरा रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। आने वाले 48 घंटे यह तय करेंगे कि यह समझौता विश्व को शांति की ओर ले जाएगा या मध्य-पूर्व को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर देगा। फिलहाल, दुनिया सांस थामे इस वीकेंड का इंतजार कर रही है।

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