होर्मुज में ईरान की नाकेबंदी फेल: उल्टा खुद के लिए बनी मुसीबत, तेल सप्लाई में 50% का उछाल
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दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की ईरान की कोशिशें अब पूरी तरह नाकाम होती दिख रही हैं। ईरान ने दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए रास्ते को बाधित किया, लेकिन इस फैसले ने अंततः ईरान की ही अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।

आंकड़ों में सुधार: सप्लाई में 50% की बढ़त वोर्टेक्सा के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 के शुरुआती 10 दिनों में होर्मुज से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई में 50 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। मई में जहां प्रतिदिन 1.2 मिलियन बैरल तेल की आवाजाही हो रही थी, वहीं अब यह आंकड़ा 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। सैटेलाइट ट्रैकिंग की पुष्टि बताती है कि वैश्विक तेल बाजार के लिए यह एक बड़ी राहत है।

ईरान का आत्मघाती कदम 28 फरवरी 2026 को होर्मुज बंद करने के ईरान के फैसले का सबसे बुरा असर खुद ईरान पर ही पड़ा है। अमेरिका द्वारा 13 अप्रैल 2026 को लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकाबंदी के बाद, ईरान का अपना तेल निर्यात लगभग ठप हो चुका है। ईरान अपनी आय का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात (जिसका 90% चीन को जाता है) से कमाता था, लेकिन अब उस पर भारी आर्थिक संकट मंडरा रहा है।

धमकियां बेअसर, डार्क वोयाज से जारी आवाजाही ईरान ने होर्मुज पर टोल लगाने और जहाजों की आवाजाही रोकने की कई बार धमकियां दीं, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें 88-110 डॉलर के दायरे में ही स्थिर रहीं। वास्तव में, ईरान की धमकियां बाजार को डराने में विफल रहीं। इसके उलट, कई जहाज डार्क वोयाज (AIS सिग्नल बंद करके) के जरिए चुपचाप इस गलियारे से निकल रहे हैं।

निष्कर्ष: ईरान की चाल उलटी पड़ी ईरान की मंशा होर्मुज को एक हथियार बनाकर अमेरिका के साथ मोलभाव करने की थी, लेकिन यह रणनीति पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई है। भले ही अभी भी होर्मुज से होने वाली सप्लाई पुरानी दर (20 मिलियन बैरल प्रतिदिन) तक नहीं पहुंची है, लेकिन ईरान का अपने ही निर्यात को नुकसान पहुंचाना और वैश्विक दबाव में घिरना यह दर्शाता है कि उसने दूसरों को परेशान करने के चक्कर में अपना ही बड़ा नुकसान कर लिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी स्पष्ट कर दिया है कि कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बिना किसी बड़ी रुकावट के जारी है।

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