AI की दुनिया में भारत की भूमिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में डर का माहौल है कि ये तकनीक इंसानों की नौकरियां छीन लेगी। अब तक माना जा रहा था कि खतरा सिर्फ व्हाइट-कॉलर जॉब्स (ऑफिस वर्क) तक सीमित है, लेकिन अब खतरा शारीरिक मेहनत वाले कामों तक पहुँच गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि भविष्य में इंसानों की जगह लेने वाले इन रोबोट्स को तैयार करने का काम कोई और नहीं, बल्कि भारतीय कर रहे हैं।
रोबोट्स को सिखा रहे हैं इंसानी चाल चेन्नई से लेकर बेंगलुरु तक, भारत में हजारों AI सिस्टम ट्रेनर्स की एक फौज खड़ी हो गई है। इनमें घरेलू महिलाएं और मजदूर शामिल हैं, जो अनजाने में ही अपने भविष्य के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। ये लोग रोबोट्स को इंसानों की तरह चलना-फिरना, सैंडविच बनाना, कॉफी मशीन चलाना या तौलिया मोड़ने जैसी बारीकियां सिखा रहे हैं।
₹250 के लिए खतरे का सौदा इस काम के बदले मिलने वाला पैसा बेहद कम है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोगों को महज ₹200 से ₹250 प्रति घंटे दिए जाते हैं। इसके लिए उन्हें अपने सिर पर कैमरा या स्मार्टफोन बांधकर घर के काम करने होते हैं। इस डेटा को एगोसेंट्रिक डेटा (Egocentric Data) कहा जाता है। इसमें कैमरा केवल इंसान के हाथों की हरकत रिकॉर्ड करता है, जिसे बाद में AI मॉडल्स में फीड किया जाता है ताकि रोबोट हूबहू इंसानी नकल कर सकें।
बड़ी कंपनियों के लिए बन रहे मिडलमैन ऑब्जेक्टवेज (Objectways) जैसी कंपनियां इस डेटा को जुटाने का काम कर रही हैं, जिनके क्लाइंट्स में अमेजन जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां शामिल हैं। भारत इस समय विश्व के लिए एआई डेटा प्रोसेसिंग का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट बताती है कि 2050 तक दुनिया में 1 अरब से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट्स होंगे, जो हमारे घरों और फैक्ट्रियों में काम करेंगे।
नीति आयोग की चेतावनी नीति आयोग ने भी इस खतरे पर अपनी चिंता जाहिर की है। संस्था का कहना है कि एआई का असर सिर्फ ऑफिस के काम तक सीमित नहीं रहेगा। भारत के 49 करोड़ से अधिक असंगठित क्षेत्र के मजदूर, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, उनके काम पर एआई का सीधा असर पड़ेगा। यह देखना बाकी है कि तकनीक की यह दौड़ भारत के श्रम बाजार को किस दिशा में ले जाती है।
The Indian workers training AI robots to take their jobs.
— AFP News Agency (@AFP) June 11, 2026
Paid to have a camera strapped to their foreheads, a growing army of thousands of AI system trainers in the world s most populous country are teaching machines how to move like humans in the real world – from folding… pic.twitter.com/Y7L6belJoc
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: घर-घर योग के महाअभियान में शामिल होंगे प्रदेशवासी, CM मोहन यादव का आह्वान
शत्रुघ्न सिन्हा की खेलेगी राजनीति : पीएम मोदी को बधाई देकर ममता बनर्जी और केजरीवाल को क्यों किया टैग?
PoK में कोहराम: सस्ता आटा और बिजली मांग रहे लोगों पर बरसीं गोलियां, 16 की मौत
Blinkit का जादुई कीबोर्ड: कुछ भी टाइप करें और हाजिर हो जाएगी चॉकलेट, क्या यह प्राइवेसी के लिए खतरा है?
सोनम वांगचुक का मराठी अंदाज: पुणे में फूटा छात्रों का गुस्सा, पेपर लीक के खिलाफ छेड़ी जंग
आधी रात को केक, भावुक पोस्ट और सियासी हलचल: लालू यादव ने परिवार संग मनाया जन्मदिन
बेलफास्ट से ब्रिटेन तक फैली हिंसा: चाकूबाजी की घटना के बाद भड़की आग, एलन मस्क ने किया समर्थन
महेंद्र माखिजानी का काला सच: 955 करोड़ का फ्रॉड, ड्रग्स और सेक्स पार्टियों से ब्लैकमेलिंग का खेल
रोहित शर्मा का बड़ा धमाका: तोड़ेंगे 37 साल पुराना दिग्गज रिकॉर्ड, हासिल करेंगे नंबर-1 की कुर्सी
कान्ये वेस्ट पर बढ़ा कानूनी शिकंजा: मॉडल जेनिफर एन ने वीडियो शूट के दौरान गला घोंटने के आरोपों को दोहराया