क्या बिहार खाली हो चुका है सरकारी खजाना? तेजस्वी के तीखे सवालों से गरमाई सियासत
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बिहार की राजनीति में एक बार फिर वित्तीय संकट को लेकर घमासान छिड़ गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की सम्राट सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए पूछा है कि क्या बिहार दिवालिया होने की कगार पर है?

क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत तब हुई जब बिहार कैबिनेट ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान के लिए बिहार आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से 3,662 करोड़ रुपये निकालने की मंजूरी दी। तेजस्वी यादव ने इसे राज्य की बदहाल आर्थिक स्थिति का सबूत करार दिया है।

तेजस्वी का गंभीर आरोप तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि पेंशन जैसे नियमित खर्च के लिए आकस्मिकता निधि का उपयोग क्यों करना पड़ रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी खजाना खाली है, जिसके कारण पिछले कई महीनों से कर्मचारियों का वेतन, पेंशन, ठेकेदारों का भुगतान और छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं ठप पड़ी हैं।

डबल इंजन सरकार पर निशाना आरजेडी नेता ने मुख्यमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि दशकों से डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद यह नौबत क्यों आई? उन्होंने दावा किया कि बिजली कटौती से लेकर स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना तक, सरकार के पास फंड की कमी साफ दिख रही है। उन्होंने यहां तक दावा किया कि धन की कमी के चलते बिहार राज्य फसल सहायता योजना को भी बंद कर दिया गया है।

वित्त विभाग का खंडन तेजस्वी के दावों पर राज्य के वित्त विभाग ने पलटवार किया है। उप मुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने साफ किया कि आकस्मिकता निधि से बजट का प्रावधान करना एक सामान्य और रूटीन प्रक्रिया है। इसे वित्तीय संकट के तौर पर देखना गलत है।

सरकार का पक्ष वित्त विभाग ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपनी लोक कल्याणकारी नीतियों के प्रति प्रतिबद्ध है। सरकार ने दावा किया कि उन्होंने 94 लाख से अधिक पेंशनधारियों के खातों में 1,096 करोड़ रुपये की राशि अंतरित कर दी है। विभाग के अनुसार, ऐसी प्रक्रियाओं को बाद में विधानमंडल के आगामी सत्र में संपुष्ट (Validate) कर लिया जाता है।

फिलहाल, इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जहां एक ओर विपक्ष इसे वित्तीय आपातकाल जैसा संकेत बता रहा है, वहीं सरकार इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताकर पल्ला झाड़ रही है।

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