जसपाल राणा केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय निशानेबाजी की उस नींव का पत्थर थे जिस पर आज के चैंपियन खड़े हैं। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे राणा ने तब देश को पदक दिलाना शुरू किया था, जब भारत में खेल का मतलब केवल क्रिकेट हुआ करता था।
एक किशोर जिसने इतिहास रचा 1994 के विक्टोरिया राष्ट्रमंडल खेलों में जब किशोर राणा ने स्वर्ण पदक जीता, तो उनके पिता द्वारा उन्हें कंधों पर उठाए जाने की तस्वीर इतिहास में दर्ज हो गई। उस समय भारत के लिए निशानेबाजी एक अनजाना खेल था, लेकिन राणा ने अपनी मेहनत से इसे भारतीय खेल जगत के मानचित्र पर ला खड़ा किया।
संघर्ष और जुझारूपन की मिसाल राणा का करियर उनकी अटूट इच्छाशक्ति का प्रमाण रहा है। 1995 की राष्ट्रमंडल निशानेबाजी चैंपियनशिप में फूड प्वाइजनिंग हो या 2006 के दोहा एशियाई खेलों में तेज बुखार, राणा ने बीमारी को कभी अपने लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने शारीरिक पीड़ा के बावजूद स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया था कि एक असली चैंपियन किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानता।
ओलंपिक पदकों की नींव यद्यपि राणा खुद ओलंपिक पदक से चूक गए, लेकिन राजवर्धन सिंह राठौड़ और अभिनव बिंद्रा जैसे दिग्गजों के लिए उन्होंने जो जमीन तैयार की, वह अमूल्य है। महज 12 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वर्ण जीतने वाले राणा ने दो दशकों तक भारतीय निशानेबाजी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
मैदान से राजनीति तक का सफर खेल के अलावा राणा का जीवन उतार-चढ़ाव भरा रहा। उनके पिता नारायण सिंह राणा एक पूर्व सैनिक थे। पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाई, हालांकि उन्हें चुनावी सफलता नहीं मिल सकी। वे भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों से जुड़े रहे।
एक कोच के रूप में विरासत एक बेहतरीन निशानेबाज होने के साथ-साथ जसपाल राणा एक कुशल कोच भी थे। युवा प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें तराशने की उनकी क्षमता ने उन्हें द्रोणाचार्य जैसी ख्याति दिलाई। वे भारतीय निशानेबाजी की उस पीढ़ी का चेहरा थे, जिसने हार न मानने की संस्कृति को जन्म दिया। आज भारतीय निशानेबाजी जिस बुलंदी पर है, उसका श्रेय काफी हद तक राणा के उस जुनून को जाता है, जिसे उन्होंने ढलती उम्र में भी कम नहीं होने दिया।
*VIDEO | Delhi: Mortal remains of renowned Indian shooting coach and former Asian Games gold medallist Jaspal Rana being taken to his residence in Dehradun.
— Press Trust of India (@PTI_News) June 12, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/TUhuGcSrAo
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