भोपाल के बरकतुल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय करने के प्रस्ताव ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। इस विरोध के बीच इतिहास के उन पन्नों को पलटना जरूरी है, जिनमें एक महान स्वतंत्रता सेनानी का संघर्ष दर्ज है। आखिर कौन थे बरकतुल्ला भोपाली और देश की आजादी में उनका क्या योगदान था?
विदेशी धरती से छेड़ा आजादी का बिगुल 1862 में भोपाल में जन्मे बरकतुल्ला भोपाली का मानना था कि गुलामी की जंजीरें तोड़ने के लिए अंग्रेजी शिक्षा और वैश्विक कूटनीति जरूरी है। लंदन में पढ़ाई के दौरान उन्होंने ब्रिटिश शासन की आर्थिक लूट को अपने लेखों और भाषणों के जरिए दुनिया के सामने रखा। अंग्रेजों की आंखों में खटकने के कारण उन्हें ब्रिटेन छोड़ना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
जापान से अमेरिका तक फैलाया प्रभाव ब्रिटेन के बाद बरकतुल्ला ने अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसे देशों को अपनी कर्मभूमि बनाया। टोक्यो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहते हुए उन्होंने इस्लामिक फ्रेटरनिटी अखबार निकालकर भारत की आजादी के पक्ष में जनमत तैयार किया। वे अमेरिका में गदर पार्टी के संस्थापकों में से थे, जिसका एकमात्र लक्ष्य सशस्त्र क्रांति के जरिए ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंकना था।
काबुल में बनाई भारत की पहली निर्वासित सरकार 1 दिसंबर 1915 को काबुल में भारत की पहली निर्वासित सरकार का गठन हुआ, जिसके प्रधानमंत्री बरकतुल्ला भोपाली थे। राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में बनी इस सरकार ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की संप्रभुता का दावा पेश किया। हालांकि इसे औपचारिक मान्यता नहीं मिली, लेकिन यह सरकार भविष्य में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद सरकार के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बनी।
आजाद देश में ही कदम रखने का था संकल्प जीवन के अंतिम वर्षों में वे लेनिन से मिले और दुनिया भर के क्रांतिकारियों के साथ सक्रिय रहे। स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद, उन्होंने कभी संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा। उनका एक ही सपना था—भारत की धरती पर तब कदम रखना जब वह स्वतंत्र हो। हालांकि, 27 सितंबर 1927 को वे यह सपना देखे हुए ही दुनिया से विदा हो गए। बरकतुल्ला भोपाली का जीवन एक मिसाल है कि आजादी की लड़ाई सिर्फ भारत के भीतर ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी लड़ी गई थी।
*#WATCH | Bhopal, Madhya Pradesh: Executive Council of Barkatullah University in Bhopal officially approves a proposal to rename the institution to Vagdevi Bhojpal University .
— ANI (@ANI) June 4, 2026
Speaking about this, the University Registrar Samar Bahadur Singh says, An Executive Council meeting… pic.twitter.com/jlthMfqvN8
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