कौन हैं रामलिंगा रेड्डी? 5 दशक की वफादारी के बाद आखिर क्यों बागी हुए कांग्रेस के ये किंगमेकर ?
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कर्नाटक की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। 72 वर्षीय वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कद्दावर मंत्री आर. रामलिंगा रेड्डी के अचानक इस्तीफे ने पूरी कांग्रेस सरकार को हिलाकर रख दिया है। दो दिन पहले मुस्कुराते हुए शपथ लेने वाले रेड्डी का यह कदम महज एक विभाग का विवाद है या बेंगलुरु की सत्ता पर वर्चस्व की बड़ी जंग?

NSUI से कैबिनेट तक: हार न मानने वाला नेता

1953 में जन्मे रामलिंगा रेड्डी का राजनीतिक सफर 5 दशक पुराना है। उन्होंने छात्र संगठन NSUI से अपने करियर की शुरुआत की थी। 1989 में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

वे बीटीएम लेआउट (BTM Layout) सीट से लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। वीरप्पा मोइली से लेकर सिद्धारमैया सरकार तक, रेड्डी ने गृह, परिवहन और शिक्षा जैसे अहम विभाग संभाले हैं। उनकी बेटी सौम्या रेड्डी वर्तमान में कर्नाटक महिला कांग्रेस की प्रमुख हैं, जो परिवार की मजबूत सियासी पकड़ को दिखाता है।

सीक्रेट वादे और विभाग का अपमान

इस बगावत के पीछे की असली वजह विभाग का बंटवारा है। सूत्रों के मुताबिक, साल 2023 के सत्ता समझौते के समय आलाकमान ने रामलिंगा रेड्डी से वादा किया था कि ढाई साल बाद उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग सौंपा जाएगा।

लेकिन जब विभागों की सूची जारी हुई, तो उन्हें प्रमुख और मध्यम सिंचाई विभाग दे दिया गया। रेड्डी ने इसे अपने राजनीतिक कद का अपमान माना। उन्होंने साफ कहा, मुझे बार-बार अपमानित किया गया है। आलाकमान के आश्वासनों पर भरोसा करने का यही सिला मिला है।

शिवकुमार का डैमेज कंट्रोल और बीजेपी की नजरें

रेड्डी के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार तुरंत हरकत में आए। उन्होंने इसे घर का मामला बताते हुए रेड्डी को अपना सबसे करीबी दोस्त करार दिया। शिवकुमार का दावा है कि वे बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझा लेंगे।

दूसरी ओर, बीजेपी ने इस मौके पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी का कहना है कि जो सरकार अपने सबसे वरिष्ठ नेता को संतुष्ट नहीं रख सकती, वह प्रदेश कैसे चलाएगी? फिलहाल, बेंगलुरु की नई विकास योजनाओं के बीच रेड्डी का यह इस्तीफा सरकार के लिए किसी बवाल-ए-जान से कम नहीं है। अब देखना यह है कि क्या शिवकुमार अपने पुराने साथी को मना पाते हैं या कर्नाटक कांग्रेस की यह दरार सरकार के लिए खतरा बन जाएगी।

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