7 साल बाद प्योंगयांग जाएंगे शी जिनपिंग: क्या रूस की बढ़ती दोस्ती से घबरा गया है चीन?
News Image

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले सप्ताह उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग का दौरा करेंगे। सात साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही यह राजकीय यात्रा वैश्विक राजनीति में हलचल मचा रही है। 8 और 9 जून को प्रस्तावित इस दौरे पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

परमाणु कार्यक्रम पर सीक्रेट चर्चा चीन के सरकारी प्रसारक के अनुसार, शी जिनपिंग का यह दो दिवसीय दौरा किम जोंग उन के निमंत्रण पर हो रहा है। हालांकि एजेंडे को गोपनीय रखा गया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम बातचीत का प्रमुख केंद्र होगा। दिलचस्प बात यह है कि यात्रा की घोषणा से ठीक पहले उत्तर कोरिया ने परमाणु बम सामग्री बनाने वाली एक नई सुविधा का खुलासा किया है।

रूस-उत्तर कोरिया की बढ़ती नजदीकियों पर चीन की नजर विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग की यह यात्रा महज औपचारिकता नहीं है। पिछले दो सालों में रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य और रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है। यूक्रेन युद्ध में हथियारों के सौदों और सैन्य संपर्कों ने बीजिंग के लिए चिंता बढ़ा दी है। चीन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उत्तर कोरिया पर उसका पारंपरिक प्रभाव कम न हो और प्योंगयांग पूरी तरह मास्को के पाले में न चला जाए।

कोरियाई प्रायद्वीप में चीन की बिसात उत्तर कोरिया के लिए चीन सबसे बड़ा आर्थिक और राजनीतिक मददगार है। शी जिनपिंग का 2026 की अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए प्योंगयांग को चुनना संदेश देता है कि बीजिंग, कोरियाई प्रायद्वीप में अपनी केंद्रीय भूमिका को किसी भी कीमत पर छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। चीन रूस की बढ़ती भूमिका को संतुलित करने के लिए अपनी रणनीतिक उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

इतिहास की कड़ी में एक अहम पड़ाव शी जिनपिंग की यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क को नई ऊर्जा देने वाली है। गौरतलब है कि पिछले 21 सालों में चीन के राष्ट्रपतियों द्वारा उत्तर कोरिया की यह मात्र तीसरी यात्रा है। इससे पहले 2019 में शी जिनपिंग प्योंगयांग गए थे। हाल ही में बीजिंग में आयोजित एक सैन्य परेड के दौरान भी शी और किम की मुलाकात ने इन दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की नींव को और गहरा किया था।

अब देखना यह है कि शी जिनपिंग का यह दौरा क्या किम जोंग उन को रूस के प्रभाव से बाहर निकाल पाता है या फिर न्यूक्लियर खिचड़ी के साथ नई वैश्विक घेराबंदी की पटकथा लिखी जाती है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

आनंद महिंद्रा का जादू भरा कदम: नैनीताल के नन्हे कलाकार को देंगे नई उड़ान

Story 1

पुतिन की महफिल में चर्चा का केंद्र बनीं रहस्यमयी महिला, पीएम मोदी की तारीफ पर मुस्कान ने खींचा ध्यान

Story 1

मालवीय नगर अग्निकांड के बाद एक्शन मोड में दिल्ली सरकार: अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर, CM की हाई-लेवल बैठक आज

Story 1

भारत के लिए ऊर्जा का नया द्वार: अंडमान सागर में मिला नेचुरल गैस का विशाल भंडार

Story 1

श्रीलंका में दिखा वैभव का नया अवतार: ट्राई सीरीज के लिए हुए लैंड, नए हेयरस्टाइल ने खींचा ध्यान

Story 1

राजस्थान की राजनीति में बड़ा उलटफेर: कांग्रेस फिर सचिन पायलट को सौंप सकती है प्रदेश की कमान

Story 1

तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल: अन्नामलाई की नई पार्टी वी द लीडर्स को मिला तूफानी समर्थन

Story 1

नेपाल के विदेश मंत्री का दिल्ली दौरा: क्या बदलेगी भारत और नेपाल की रणनीतिक बिसात?

Story 1

रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे से कर्नाटक में सियासी हलचल, डैमेज कंट्रोल में जुटे CM डीके शिवकुमार

Story 1

झारखंड राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस-JMM में ठनी, क्या इंडिया गठबंधन में पड़ने वाली है दरार?