फीफा वर्ल्ड कप चैंपियन को असली ट्रॉफी क्यों नहीं मिलती? जानिए इसके पीछे का हैरान करने वाला सच
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फुटबॉल का महाकुंभ फीफा वर्ल्ड कप 2026 जल्द ही शुरू होने वाला है। फैंस के मन में यह सवाल अक्सर आता है कि क्या चैंपियन टीम को वही ऐतिहासिक ट्रॉफी अपने घर ले जाने दी जाती है, जिसे उन्होंने मैदान पर उठाया था? जवाब है—नहीं। अर्जेंटीना ने 2022 में जब खिताब जीता, तो उन्हें भी कुछ समय के लिए ही असली ट्रॉफी दी गई थी।

असली और डुप्लीकेट ट्रॉफी का खेल मैदान पर जीत के जश्न के दौरान जो ट्रॉफी खिलाड़ियों के हाथों में होती है, वह असली होती है। लेकिन यह सिर्फ तस्वीरें खिंचवाने और लैप ऑफ ऑनर (Lap of Honour) के लिए दी जाती है। जश्न खत्म होते ही फीफा के अधिकारी इसे वापस ले लेते हैं। इसके बदले विजेता टीम को एक डुप्लीकेट ट्रॉफी (Replica) दी जाती है, जिसे विनर्स ट्रॉफी कहा जाता है। यह कांस्य की बनी होती है और इस पर सोने की परत चढ़ी होती है।

असली ट्रॉफी का असली ठिकाना फीफा की असली ट्रॉफी हमेशा फीफा के पास ही रहती है। इसे स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में स्थित फीफा संग्रहालय में बेहद सुरक्षा के बीच रखा जाता है। यह ट्रॉफी केवल खास मौकों पर बाहर निकलती है, जैसे कि ग्लोबल ट्रॉफी टूर, ड्रॉ समारोह, या फाइनल मैच के दिन।

ट्रॉफी छूने पर भी सख्त नियम क्या हर कोई इस बेशकीमती ट्रॉफी को छू सकता है? बिल्कुल नहीं। इसके लिए कड़े नियम हैं। बिना दस्तानों के इसे छूने का अधिकार सिर्फ वर्ल्ड कप जीतने वाले खिलाड़ी, कोचिंग स्टाफ, अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष और फीफा के कुछ उच्च अधिकारियों को ही है।

चोरी की घटनाओं से बदला नियम इतिहास में जूल्स रिमेट ट्रॉफी के साथ जो हुआ, उसके बाद फीफा ने नियम बदल दिए। 1966 और 1983 में असली ट्रॉफी चोरी हो गई थी। ब्राजील से चोरी होने के बाद तो चोरों ने उसे पिघला ही दिया था। इसके बाद 1974 में फीफा ने नियम बनाया कि कोई भी देश असली ट्रॉफी को स्थायी रूप से अपने पास नहीं रख सकता। 2005 में इस नियम को और सख्त कर दिया गया।

क्यों इतनी खास है ये ट्रॉफी? 18 कैरेट ठोस सोने से बनी इस ट्रॉफी का वजन 6.175 किलोग्राम है और इसकी कीमत करोड़ों में है। इसी कारण इसे सुरक्षा और विरासत के नजरिए से कभी किसी देश को नहीं सौंपा जाता।

फीफा वर्ल्ड कप 2026: एक नया इतिहास इस बार का विश्व कप कई मायनों में ऐतिहासिक है। 11 जून से शुरू होने वाले इस टूर्नामेंट की मेजबानी अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा मिलकर कर रहे हैं। इतिहास में पहली बार 32 की जगह 48 टीमें हिस्सा लेंगी और कुल 104 मुकाबले खेले जाएंगे। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या अर्जेंटीना अपना खिताब बचा पाएगी या कोई नई टीम इतिहास रचेगी।

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