दो दिन में सब बता दूंगा : नई पार्टी की अटकलों के बीच अन्नामलाई का रहस्यमयी बयान, क्या बीजेपी से अलग होने की तैयारी?
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तमिलनाडु की राजनीति में बीजेपी के फायरब्रांड नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। नई पार्टी बनाने की अटकलों के बीच, जब दिल्ली रवाना होते समय उनसे इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, दो दिन इंतजार कीजिए, फिर बैठकर बात करेंगे। उनके इस संक्षिप्त जवाब ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।

कोयंबटूर में समर्थकों का शक्ति प्रदर्शन

अन्नामलाई के जन्मदिन से पहले कोयंबटूर में लगाए गए पोस्टरों ने सस्पेंस और बढ़ा दिया है। पोस्टरों में लिखा है— हमारे नेता, आइए और हमारा नेतृत्व कीजिए और निडर सोच की कोई सीमा नहीं। दिलचस्प बात यह है कि ये पोस्टर ऐसी जगह लगाए गए हैं, जहां बीजेपी की राज्य समिति की बैठक चल रही है, जिससे अन्नामलाई ने दूरी बना रखी है। उनके समर्थकों का संगठन अन्नामलाई अन्बू कूट्टम भी तेजी से सदस्यता अभियान चला रहा है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं।

केंद्र से टकराव की असली वजह

अन्नामलाई और बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व के बीच दरार का मुख्य कारण तीन भाषा नीति बनी है। केंद्र सरकार द्वारा कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाएं अनिवार्य करने के फैसले का अन्नामलाई ने सोशल मीडिया पर खुलकर विरोध किया था। उन्होंने इसे तमिलनाडु के छात्रों और अभिभावकों के साथ अन्याय बताया। पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर की गई इस सार्वजनिक टिप्पणी को बीजेपी आलाकमान ने अनुशासनहीनता माना, जिसके बाद से दोनों के बीच दूरियां बढ़ती गईं।

चुनावी टिकट और पुरानी रंजिश

अन्नामलाई के राजनीतिक ग्राफ में गिरावट तब स्पष्ट हुई, जब उन्हें विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया गया। इससे पहले, एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ गठबंधन को लेकर उनके बयानों के कारण भी विवाद हुआ था। माना जाता है कि एआईएडीएमके के दबाव में ही उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाया गया। तब से ही वे पार्टी बैठकों से लगातार गायब हैं, जिससे उनके विद्रोह की आशंकाओं को बल मिला है।

अब आगे क्या?

विपक्षी दल भी इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने चुटकी लेते हुए राज्य में एक और नई पार्टी के जन्म की ओर इशारा किया है। फिलहाल, अन्नामलाई दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करने वाले हैं। अब सबकी निगाहें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं कि क्या अन्नामलाई बीजेपी में अपनी राहें सुधारेंगे या फिर तमिलनाडु की राजनीति में एक नए सियासी विकल्प को जन्म देंगे।

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