स्विट्जरलैंड के होटल का भारतीयों के लिए खास फरमान: क्या हमारा सिविक सेंस है सवालों के घेरे में?
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सोशल मीडिया पर इन दिनों नागरिक शिष्टाचार (Civic Sense) को लेकर एक तीखी बहस छिड़ी हुई है। इसकी शुरुआत उद्योगपति हर्ष गोयनका के एक हालिया पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने स्विट्जरलैंड के एक होटल में भारतीय पर्यटकों के लिए लगाए गए विशेष नियमों का जिक्र किया।

होटल के सख्त निर्देश गोयनका ने बताया कि उन्होंने स्विट्जरलैंड के ग्स्टाड शहर में एक होटल देखा, जहां भारतीय मेहमानों के लिए अलग से निर्देशों की एक सूची लगी थी। इस सूची में खाने-पीने के तरीके से लेकर बातचीत के स्तर तक को नियंत्रित करने की कोशिश की गई थी। किसी एक विशेष देश के नागरिकों के लिए इतने सख्त नियमों का होना कई लोगों को हैरान कर रहा है।

खाने-पीने पर रोक और जुर्माने होटल के नियमों में साफ लिखा था कि नाश्ते का समय सुबह 7:30 से 10:30 बजे तक ही है। मेहमानों को भोजन अपने साथ कमरे में ले जाने की सख्त मनाही थी। यदि किसी को लंच पैक चाहिए, तो उसे अतिरिक्त भुगतान करना होगा। साथ ही, बुफे से जरूरत से ज्यादा खाना उठाने या दो लोगों के एक ही थाली साझा करने पर अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान भी रखा गया था।

शोर-शराबे पर लगाम होटल प्रशासन ने भारतीय मेहमानों को कॉरिडोर और बालकनी में धीमी आवाज में बात करने की सलाह दी थी। नियमों में स्पष्ट किया गया था कि होटल में दुनिया भर से लोग आराम करने आते हैं, इसलिए दूसरों की निजता और शांति का सम्मान करना अनिवार्य है।

वायरल वीडियो पर चिंता हर्ष गोयनका ने इस स्थिति के पीछे सार्वजनिक स्थानों पर भारतीयों के बिगड़ते व्यवहार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने हालिया वायरल वीडियो का उदाहरण दिया, जिसमें लोग रेस्तरां में गरबा करते, हवाई अड्डों पर जोर-जोर से चिल्लाते और विमान के अंदर पिकनिक मनाते दिखते हैं। गोयनका के अनुसार, ऐसी हरकतें वैश्विक स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।

जापान से सीख की जरूरत गोयनका ने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के लोगों का अनुशासन और विनम्रता उन्हें दुनिया में सम्मान दिलाती है। उनका मानना है कि यदि भारत को वैश्विक महाशक्ति बनना है, तो केवल आर्थिक प्रगति ही काफी नहीं है। हमें अपने नागरिक शिष्टाचार में भी सुधार करना होगा ताकि दुनिया में भारतीयों की एक सकारात्मक और सभ्य पहचान बन सके।

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