क्या पाकिस्तान में रक्षा मंत्री सेना प्रमुख को रिपोर्ट करते हैं? पाकिस्तान की सत्ता की कमान किसके हाथ में है, यह सवाल हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। हाल ही में ब्रिटिश पत्रकार मेहदी हसन ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ से एक ऐसा तीखा सवाल पूछ लिया कि वे सकपका गए। मेहदी हसन ने सीधा पूछा, दुनियाभर में सेना प्रमुख रक्षा मंत्री के प्रति जवाबदेह होते हैं, लेकिन पाकिस्तान में रक्षा मंत्री खुद आर्मी चीफ को रिपोर्ट करते हैं। क्या यह सच नहीं है?
सवाल सुनते ही ख्वाजा आसिफ की असहजता इस सीधे सवाल के जवाब में ख्वाजा आसिफ ने पहले तो इनकार किया, लेकिन जब मेहदी हसन ने उनसे पूछा कि क्या जनरल आसिम मुनीर उनसे ज्यादा ताकतवर हैं, तो रक्षा मंत्री के पास कोई ठोस तर्क नहीं था। उन्होंने हंसकर बात को टालने की कोशिश की और खुद को एक साधारण राजनीतिक कार्यकर्ता बताया। उनकी यह हंसी उस असहजता को छिपाने की कोशिश थी, जिसे पूरी दुनिया समझती है।
GHQ का दबदबा और राजनीतिक मजबूरी पाकिस्तान के संविधान के अनुसार देश की कमान नागरिक सरकार के पास होनी चाहिए, लेकिन हकीकत में रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय (GHQ) ही असली पावर सेंटर है। विदेश नीति से लेकर सुरक्षा और आर्थिक फैसलों तक, अंतिम मुहर सेना प्रमुख की ही होती है। ख्वाजा आसिफ जैसे मंझे हुए नेता भी इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर सकते, क्योंकि ऐसा करना लोकतांत्रिक ढांचे के दावों की धज्जियां उड़ाने जैसा होगा।
सेना का वर्चस्व: राजनीति से लेकर बिजनेस तक पाकिस्तान में सेना का प्रभाव केवल शासन तक सीमित नहीं है। देश के बड़े रियल एस्टेट, बैंकिंग, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों पर सेना का अप्रत्यक्ष नियंत्रण है। इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी प्रधानमंत्री ने सेना के वर्चस्व को चुनौती देने की कोशिश की है, उसका हश्र इमरान खान जैसा ही हुआ है। आसिम मुनीर का कार्यकाल इस प्रभाव को और अधिक मुखर बनाता है, जहाँ सैन्य प्रमुख खुद वैश्विक मंचों पर जाकर कूटनीति संभालते नजर आते हैं।
लोकतंत्र का चोला और हकीकत का पाखंड पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक से आर्थिक मदद के लिए लोकतांत्रिक देश होने का ढोंग बनाए रखता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी आधिकारिक तौर पर नागरिक सरकार से ही संवाद करता है, जबकि पर्दे के पीछे के असली खिलाड़ी जनरल आसिम मुनीर ही हैं। मेहदी हसन का यह सवाल इसी पाखंड और हाइब्रिड रिजीम की कलाई खोलता है। ख्वाजा आसिफ भले ही हंसी में बात टाल गए हों, लेकिन यह इंटरव्यू पाकिस्तान की उस कड़वी सच्चाई को जगजाहिर कर गया, जिसे वे दुनिया से छिपाने की पूरी कोशिश करते हैं।
Mehdi Hasan: In most countries, the army chief is accountable to the defense minister.
— برهان الدین | Burhan uddin (@burhan_uddin_0) May 31, 2026
But in your country, you, as the defense minister, are accountable to the army chief. Isn t that the case?
Khawaja Asif: No, that s not the case.
Mehdi Hasan: Isn t Asim Munir more powerful… pic.twitter.com/SMc35Rg4xV
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