सुरों की मल्लिका सुमन कल्याणपुर का निधन: पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, कहा- उनकी आवाज हमेशा अमर रहेगी
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मशहूर पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनके निधन से संगीत जगत और फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। करोड़ों दिलों को अपनी मधुर आवाज से सुकून देने वाली इस महान गायिका की विदाई से प्रशंसकों में गहरा दुख है।

पीएम मोदी ने जताया गहरा शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, प्रसिद्ध गायिका सुमन कल्याणपुर के निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। उनकी मधुर आवाज और भावपूर्ण गायकी ने भारतीय संगीत और सांस्कृतिक जगत को समृद्ध बनाया।

पीएम ने आगे कहा कि सुमन कल्याणपुर ने अपने गीतों के जरिए संगीत प्रेमियों के दिलों में एक खास जगह बनाई। उन्होंने शोकाकुल परिवार और प्रशंसकों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए लिखा, उनकी आवाज हमेशा अमर रहेगी। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।

सदाबहार गानों से बनाई पहचान

सुमन कल्याणपुर के करियर का स्वर्णिम दौर 1960 और 1970 के दशक में रहा। उन्होंने अपनी जादुई आवाज से कई सदाबहार गीतों को अमर बना दिया। उनके गाए गाने आज भी लोगों की जुबां पर हैं।

उन्हें वास्तविक पहचान आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे , ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे और तुमने पुकारा और हम चले आए जैसे लोकप्रिय गीतों से मिली। उनकी गायकी में एक अलग ही मिठास और गहराई थी, जो उन्हें उस दौर के अन्य गायकों से अलग खड़ा करती थी।

विवादों के बीच चमकता सितारा

अपने करियर के दौरान उन्होंने न केवल हिंदी बल्कि मराठी, बंगाली और गुजराती सहित कई भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। दिलचस्प बात यह है कि लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच हुए मतभेदों के दौरान, सुमन कल्याणपुर ने रफी साहब के साथ 140 से अधिक सुपरहिट युगल गीत गाए, जो आज भी संगीत प्रेमी बड़े चाव से सुनते हैं।

पद्म भूषण से थीं सम्मानित

संगीत कला में उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्म भूषण सम्मान से नवाजा था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मराठी फिल्म पसंत आहे मुलगी से की थी, लेकिन अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर उन्होंने पूरे देश में अपनी पहचान बनाई।

भले ही सुमन कल्याणपुर आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सुरीली आवाज और उनके द्वारा गाए गए सदाबहार गीत आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक धरोहर के रूप में हमेशा जीवित रहेंगे।

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