इतने नाजुक हैं कि एक अंडे से ही चोट लग गई , अभिषेक बनर्जी के मुद्दे पर दिलीप घोष का तंज
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पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले को लेकर सूबे की राजनीति गरमा गई है। इस घटना पर वरिष्ठ भाजपा नेता दिलीप घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने न केवल अभिषेक बनर्जी पर कटाक्ष किया, बल्कि टीएमसी सरकार के पिछले 15 वर्षों के कार्यकाल पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

कानून हाथ में लेना गलत, लेकिन जनता का गुस्सा जायज दिलीप घोष ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के साथ जो हुआ, वह नहीं होना चाहिए और किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। हालांकि, उन्होंने तुरंत जोड़ा कि बीते 15 वर्षों में टीएमसी राज में लोगों ने जो अत्याचार झेले हैं, उसका रोष अब बाहर आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के छोटे-छोटे नेता भी रसूख के साथ घूमते थे और आम जनता की सुविधाओं की परवाह नहीं करते थे।

इतने नाजुक हैं कि एक अंडे से ही चोट लग गई अभिषेक बनर्जी की चोट पर चुटकी लेते हुए दिलीप घोष ने कहा, वे इतने नाजुक हैं कि एक अंडा फेंका गया और उतने में ही चोट लग गई। हमने खुद कितनी चोटें झेली हैं, कभी विपक्ष में रहने का मजा चखना चाहिए। घोष ने याद दिलाया कि जब जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था, तब ईंट-पत्थर फेंके गए थे और 10 गाड़ियां तोड़ दी गई थीं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान उनके शरीर पर आज भी उन हमलों के निशान हैं।

सरकारी अस्पतालों पर निशाना ममता बनर्जी के आरोपों और सरकारी अस्पतालों का जिक्र करते हुए घोष ने कहा कि टीएमसी नेता अब मजबूरी में अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं क्योंकि उन्हें कानूनी कार्रवाई के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत है। उन्होंने तंज कसा कि इनके मंत्री और विधायक पहले सरकारी अस्पतालों में कुत्तों का इलाज कराने के लिए मशहूर थे। अब जब खुद को बारी आई, तो अस्पताल की स्थिति का पता चल रहा है।

मौत के आंकड़ों का हिसाब कौन देगा? दिलीप घोष ने टीएमसी नेता कुणाल घोष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि बीते 10-12 वर्षों में उनके 321 कार्यकर्ताओं की हत्या की गई, लेकिन पुलिस ने कितनी एफआईआर दर्ज की? उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव बाद हिंसा में 56 कार्यकर्ताओं की मौत हुई और दुष्कर्म पीड़ित 35 महिलाओं की शिकायत तक दर्ज नहीं की गई थी।

राजनीति पर असर अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद ममता बनर्जी को राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे विपक्षी नेताओं का साथ मिला है। यह घटना अब बंगाल की स्थानीय राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय सुर्खियों में पहुंच गई है, जिससे दिल्ली तक की सियासी हवा बदलने के कयास लगाए जा रहे हैं।

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