हाल ही में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 के आंकड़े भारत में महिला स्वास्थ्य, शिक्षा और सशक्तिकरण की एक मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं। जहां एक ओर देश ने मातृ स्वास्थ्य और संस्थागत प्रसव में ऐतिहासिक प्रगति की है, वहीं दूसरी ओर राज्यों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं का अंतर अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
केरल ने एक बार फिर साबित किया है कि शिक्षा और जागरूकता का मेल स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्या चमत्कार कर सकता है। राज्य में 99.7 प्रतिशत प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं, जो लगभग शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव का आंकड़ा है।
इतना ही नहीं, केरल की 88.6 प्रतिशत माताओं ने गर्भावस्था के दौरान अनिवार्य 4 प्रसव पूर्व जांच (ANC) पूरी की हैं। राज्य में महिलाओं की 86.6 प्रतिशत साक्षरता दर और 91.7 प्रतिशत महिलाओं का स्वतंत्र बैंक खाता होना यह दर्शाता है कि वहां महिलाएं आर्थिक और सामाजिक रूप से कितनी सशक्त हैं।
केरल के अलावा गोवा, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और गुजरात ने महिला स्वास्थ्य मानकों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। गोवा 88 प्रतिशत ANC कवरेज के साथ चार्ट में दूसरे स्थान पर मजबूती से टिका है। वहीं, केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ने 95.1 प्रतिशत ANC कवरेज के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।
NFHS-6 की रिपोर्ट बिहार के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। हालांकि पिछले वर्षों के मुकाबले मामूली सुधार हुआ है, लेकिन प्रमुख संकेतकों में राज्य अभी भी निचले पायदान पर है।
बिहार में सिर्फ 37.6 प्रतिशत महिलाएं ही प्रसव पूर्व चारों जांच (ANC) करा पाती हैं। कुपोषण की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राज्य में 26.3 प्रतिशत महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) सामान्य से काफी कम है।
बिहार में केवल 33.1 प्रतिशत महिलाएं ही 10वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी कर पा रही हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा के अलावा सामाजिक सुरक्षा भी यहां एक बड़ा मुद्दा है। सर्वे के अनुसार, 36.1 प्रतिशत विवाहित महिलाओं ने घरेलू हिंसा का शिकार होने की बात स्वीकार की है, जो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार है।
NFHS-6 के आंकड़े स्पष्ट संदेश देते हैं—संस्थागत प्रसव दर में 90.6 प्रतिशत की राष्ट्रीय वृद्धि उत्साहजनक है, लेकिन जमीनी स्तर पर पोषण, शिक्षा और सुरक्षा की खाई को पाटना अभी बाकी है। जब तक बिहार जैसे राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और महिला साक्षरता पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक देश की आधी आबादी का स्वास्थ्य का सपना अधूरा रहेगा।
𝐇𝐞𝐚𝐥𝐭𝐡 𝐌𝐢𝐧𝐢𝐬𝐭𝐫𝐲 𝐑𝐞𝐥𝐞𝐚𝐬𝐞𝐬 𝐍𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧𝐚𝐥 𝐅𝐚𝐦𝐢𝐥𝐲 𝐇𝐞𝐚𝐥𝐭𝐡 𝐒𝐮𝐫𝐯𝐞𝐲 – 𝟔
— All India Radio News (@airnewsalerts) May 29, 2026
🚺NFHS-6 Reflects India’s Accelerated Progress in Maternal and Child Health, Nutrition and Financial Protection
🤰Institutional Deliveries Reach 90.6%
✴️ANC Coverage… pic.twitter.com/CvkIHPXsuV
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