लाल टोपी पहन आइसक्रीम बेचेगा तुर्की? साइप्रस के ब्रह्मोस खरीदने की खबर से अंकारा में खलबली
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भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। अब यूरोप के गेटवे माने जाने वाले साइप्रस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल और घातक ड्रोन खरीदने की इच्छा जताई है। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स की हालिया भारत यात्रा ने इस संभावित रक्षा सौदे की नींव मजबूत कर दी है।

तुर्की के लिए बड़ा रणनीतिक झटका यदि यह सौदा पूरा होता है, तो यह तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के लिए एक बड़ा झटका होगा। तुर्की दशकों से उत्तरी साइप्रस पर अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठा है। भारत निर्मित ब्रह्मोस की पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में तैनाती सीधे तौर पर तुर्की के प्रभुत्व को चुनौती देगी।

क्या-क्या खरीद सकता है साइप्रस? रिपोर्ट्स के अनुसार, साइप्रस भारत से ब्रह्मोस मिसाइल के साथ-साथ नागास्त्र-1 और स्काईस्ट्राइकर जैसे आत्मघाती ड्रोन में दिलचस्पी दिखा रहा है। इन हथियारों ने पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ हुए संघर्ष में अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाया था।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: आइसक्रीम बेचने लायक ही बचे हो इस खबर के बाद सोशल मीडिया पर एक्सपर्ट्स और यूजर्स के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। एक यूजर ने तुर्की पर तंज कसते हुए कहा, कश्मीर पर खलीफा बनने का नाटक करने वाले अब लाल टोपी पहनकर सिर्फ आइसक्रीम बेचेंगे।

वहीं, रणनीतिक मामलों के जानकार पॉल ऑटोनोपाउलोस ने कहा कि तुर्की की गलत नीतियों का ही परिणाम है कि भारत अब ग्रीस और साइप्रस को हथियार उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि तुर्की ने कश्मीर मुद्दे में बेवजह दखल देकर भारत को उकसाया है, जिसका खामियाजा अब उसे भुगतना पड़ रहा है।

तुर्की की बेचैनी, पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव तुर्की के सुरक्षा मामलों के जानकार राउफ कोसे ने इसे भारत और इजरायल की मिलीभगत बताया है। उन्होंने तुर्की सरकार को सलाह दी है कि अब पाकिस्तान को और अधिक सैन्य समर्थन देने की जरूरत है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि तुर्की अपनी नव-ओटोमन नीति के कारण वैश्विक स्तर पर अकेला पड़ता जा रहा है।

क्यों करीब आ रहे हैं भारत और साइप्रस? भारत और साइप्रस दोनों ही तुर्की की विस्तारवादी नीतियों से परेशान हैं। 1974 से तुर्की ने साइप्रस के एक तिहाई हिस्से पर कब्जा कर रखा है। हाल ही में दोनों देशों ने रक्षा सहयोग के लिए पांच साल का एक रोडमैप तैयार किया है। भारत का यह कदम न केवल रक्षा निर्यात को बढ़ावा देगा, बल्कि तुर्की द्वारा पाकिस्तान को ड्रोन और तकनीकी मदद देने के जवाब में एक कड़े रणनीतिक संदेश की तरह देखा जा रहा है।

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