इजरायल से दोस्ती की तो PM-आर्मी चीफ को मार देंगे , पाकिस्तान में लश्कर की खुली धमकी
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर भी दिखने लगा है। अमेरिका के कथित दबाव के बीच पाकिस्तान को अब घर के भीतर से ही जानलेवा धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।

अब्राहम अकॉर्ड और ट्रंप का दबाव रिपोर्ट्स के अनुसार, नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि पाकिस्तान भी अब्राहम अकॉर्ड (Abraham Accords) पर हस्ताक्षर करे। यह समझौता इजरायल को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देने और खाड़ी देशों के साथ उसके व्यापारिक संबंधों को सामान्य बनाने पर आधारित है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन जैसे देश पहले ही इस समझौते का हिस्सा बन चुके हैं।

लश्कर के डिप्टी चीफ का खूनी ऐलान पाकिस्तान के अंदर इस समझौते के खिलाफ कट्टरपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने मोर्चा खोल दिया है। लश्कर के डिप्टी चीफ सैफुल्ला कसूरी ने एक सार्वजनिक सभा में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को सीधी धमकी दी है।

ईद-उल-अजहा की नमाज के दौरान कसूरी ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, यदि पाकिस्तान सरकार ने इजरायल को मान्यता देने या अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने की जुर्रत की, तो प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ को मार दिया जाएगा। इस दौरान मंच पर मौजूद उसके सुरक्षाकर्मियों को हथियारों के साथ देखा गया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।

पाकिस्तान सरकार का आधिकारिक रुख आतंकवादी संगठनों की धमकियों और घरेलू दबाव के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल इजरायल को मान्यता देने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

आसिफ ने दो टूक कहा कि जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र का गठन नहीं हो जाता, तब तक पाकिस्तान इजरायल के साथ कोई कूटनीतिक संबंध नहीं रखेगा। उनके अनुसार, ऐसा कोई भी समझौता पाकिस्तान की वैचारिक नींव के खिलाफ होगा।

बढ़ता संकट और कूटनीतिक उलझन एक तरफ ट्रंप प्रशासन का समझौता करने का दबाव है, तो दूसरी तरफ ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के कारण खाड़ी में तेल का संकट गहरा गया है। अब पाकिस्तान के सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि वे अमेरिका के साथ संबंधों को कैसे संतुलित रखें और अपने देश में पनप रहे कट्टरपंथी तत्वों से कैसे निपटें।

फिलहाल, लश्कर की इस धमकी ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और विदेश नीति के सामने एक नया खतरा पैदा कर दिया है।

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