सीएम पद से विदाई के बाद सिद्धारमैया का बड़ा ऐलान: दिल्ली जाने से किया इनकार, राज्य की राजनीति में रहेंगे सक्रिय
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कर्नाटक की राजनीति में तीन साल तक मुख्यमंत्री रहे सिद्धारमैया ने रोटेशन पॉलिसी के तहत अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सत्ता के इस बड़े बदलाव के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह था कि 80 वर्षीय यह दिग्गज नेता आगे क्या करेंगे? क्या वे केंद्र की राजनीति में जाएंगे या कर्नाटक में ही बने रहेंगे?

सिद्धारमैया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने भविष्य की रणनीति को लेकर तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है।

दिल्ली जाने का आलाकमान का प्रस्ताव ठुकराया

कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को सम्मानजनक विदाई देते हुए उन्हें संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन सिद्धारमैया ने इस पीस ऑफर (शांति प्रस्ताव) को विनम्रतापूर्वक ठुकरा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी राष्ट्रीय राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है और वे विधायक के रूप में कर्नाटक की सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।

मेरा जीवन खुली किताब की तरह

अपने इस्तीफे के बाद भावुक होते हुए सिद्धारमैया ने अपनी बेदाग छवि का जिक्र किया। उन्होंने कहा, मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में न तो कभी धन-दौलत का पीछा किया और न ही संपत्तियां बनाईं। मेरा जीवन जनता के सामने एक खुली किताब की तरह है। उन्होंने कहा कि एक साधारण गांव से निकलकर दो बार मुख्यमंत्री बनना उनके लिए बड़ी बात रही है।

सत्ता परिवर्तन क्यों हुआ? घोटालों और रोटेशन का साया

सिद्धारमैया का हटना केवल रोटेशन फॉर्मूले का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक दबाव भी एक बड़ा कारण है। मई 2023 में राहुल गांधी ने ढाई-ढाई साल के रोटेशन का वादा किया था। वहीं, हाल के दिनों में वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाला जैसे मामलों ने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया था। पार्टी को डर था कि मंत्रियों के प्रति एंटी-इंकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को समय रहते नहीं रोका गया, तो भविष्य में कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है।

दिल्ली में दिखाए थे बगावती तेवर

सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा देने से पहले सिद्धारमैया का रुख काफी सख्त था। 26 मई को दिल्ली में आलाकमान के साथ हुई 6 घंटे की मैराथन बैठक में उन्होंने शुरुआती दौर में पद छोड़ने से इनकार कर दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि उनके साथ 50 से 60 विधायकों का समर्थन है और वे डीके शिवकुमार के नेतृत्व में काम करने को तैयार नहीं हैं। हालांकि, बाद में पार्टी नेतृत्व की समझाइश और लंबी चर्चा के बाद वे पीछे हटने को तैयार हुए।

डीके शिवकुमार का ताजपोश और कैबिनेट में बड़े बदलाव

सिद्धारमैया के हटने के बाद कनकपुरा के विधायक और संकटमोचक डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना अब तय हो चुका है। अब पार्टी नए समीकरणों पर काम कर रही है:

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