झोपड़ी में मेडल, दीवारों पर संघर्ष की कहानी: U-17 स्टार दिव्यानी लिंडा के घर पहुंचे केंद्रीय मंत्री
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रांची: अभावों की एक ऐसी हकीकत, जिसके बीच से एक सितारा बनकर उभरी हैं दिव्यानी लिंडा। भारत की अंडर-17 महिला फुटबॉल खिलाड़ी दिव्यानी का घर रांची के चंद्रा गांव में है, जहां एस्बेस्टस की छत और जर्जर दीवारों के बीच 50 से अधिक मेडल और ट्रॉफियां सजी हैं। यह मेडल उस संघर्ष की गवाही देते हैं, जिसे दिव्यानी ने अपने खेल से पार किया है।

केंद्रीय मंत्री का बड़ा आश्वासन गुरुवार को केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने दिव्यानी के घर पहुंचकर उनसे और उनके परिवार से मुलाकात की। मंत्री ने दिव्यानी को विकसित भारत की ब्रांड एंबेसडर बताते हुए कहा कि उनकी सफलता देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने परिवार की हर संभव मदद का भरोसा दिया है।

AIIMS में होगा भाई का इलाज दिव्यानी की मां दिहाड़ी मजदूरी करती हैं और उनका भाई लकवे (पैरालिसिस) से पीड़ित है। पिता को गुजरे चार साल हो चुके हैं। मंत्री ने घोषणा की है कि वे दिव्यानी के भाई के इलाज का पूरा खर्च उठाएंगे और उसे AIIMS में भर्ती कराएंगे, ताकि परिवार आर्थिक बोझ से मुक्त हो सके।

दुर्गा पूजा तक नया घर और मैदान खेल के प्रति दिव्यानी की निष्ठा को देखते हुए मंत्री संजय सेठ ने वादा किया है कि दुर्गा पूजा से पहले उनके परिवार के लिए एक पक्का घर बनवा दिया जाएगा। साथ ही, गांव में ही एक खेल का मैदान भी तैयार करवाया जाएगा, ताकि दिव्यानी और अन्य उभरते खिलाड़ी बिना किसी बाधा के प्रैक्टिस कर सकें।

मां की आंखों में थे आंसू, दिल में गर्व दिव्यानी की मां प्रतिमा देवी ने भावुक होते हुए बताया कि कैसे दिव्यानी बचपन से ही सुबह 4 बजे उठकर 5 किलोमीटर पैदल चलकर फुटबॉल की प्रैक्टिस के लिए जाती थी। उन्होंने कहा, पिता के निधन के बाद आर्थिक तंगी ने हमें तोड़ दिया था, लेकिन दिव्यानी ने हार नहीं मानी। रूस, चीन और भूटान जैसे देशों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी दिव्यानी के लिए यह समर्थन एक नई शुरुआत जैसा है।

संकल्प: 2036 के ओलंपिक पर नजर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिव्यानी का लक्ष्य केवल वर्तमान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिव्यानी को अब 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 के ओलंपिक्स की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि किसी भी प्रतिभावान खिलाड़ी की राह में गरीबी और संसाधन की कमी बाधा नहीं बनेगी।

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