मौत को मात देकर समंदर के रास्ते चीन से भागे पूर्व चीनी अफसर, 30 घंटे का खौफनाक सफर
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सीओल: चीन के मानवाधिकार हनन और दमनकारी नीतियों से तंग आकर एक 68 वर्षीय पूर्व पुलिस अधिकारी ने आजादी के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। डोंग गुआंगपिंग नाम के इस शख्स ने एक छोटी सी इन्फ्लेटेबल (रबड़ की) नाव के जरिए 30 घंटे का खतरनाक समुद्री सफर तय किया और दक्षिण कोरिया पहुंच गए।

मौत के मुंह से लौटे डोंग सोमवार को दक्षिण कोरिया के तट पर मछुआरों ने एक छोटी नाव देखी, जिसमें डोंग सवार थे। कोस्ट गार्ड ने उन्हें बचाया। डोंग के मित्र और कार्यकर्ता शेंग जू के अनुसार, डोंग चीन के शैंडोंग प्रांत के वेइहाई से निकले थे। जब वे दक्षिण कोरिया के ताएन काउंटी पहुंचे, तो उनकी नाव का इंजन खराब हो चुका था और वे लगातार दो दिनों से जागने के कारण बेहोशी की हालत में थे।

जेल और निर्वासन का लंबा इतिहास डोंग कभी मध्य चीन के झेंग्झौ में पुलिस अधिकारी थे, लेकिन 1989 के तियानमेन स्क्वायर घटनाक्रम का समर्थन करने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई। साल 2001 और 2014 में उन्हें जेल हुई। 2015 में जब उनका परिवार थाईलैंड के रास्ते कनाडा भागने में सफल रहा, तब डोंग को थाई अधिकारियों ने वापस चीन भेज दिया था, जहाँ उन्हें साढ़े तीन साल की जेल काटनी पड़ी।

विफल कोशिशों का अंत जेल से रिहा होने के बाद भी डोंग ने हार नहीं मानी। उन्होंने ताइवान के किनमेन द्वीप तक तैरकर जाने और वियतनाम के रास्ते भागने की कोशिश की, लेकिन हर बार उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 2022 में गैर-कानूनी सीमा पार करने के आरोप में उन्हें फिर 11 महीने की सजा सुनाई गई थी। बार-बार जेल जाने और परिवार से दूर रहने के मजबूरन उन्होंने यह जानलेवा कदम उठाया।

दक्षिण कोरिया के सामने कूटनीतिक चुनौती फिलहाल डोंग इमिग्रेशन कानूनों के उल्लंघन के संदेह में हिरासत में हैं। यह मामला दक्षिण कोरिया के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और राजनीतिक चुनौती बन गया है। दक्षिण कोरियाई सरकार बीजिंग के साथ अपने संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रही है, ऐसे में डोंग को शरण देना या वापस चीन भेजना एक कठिन फैसला होगा।

क्या वापस भेजे जाएंगे डोंग? डोंग के समर्थकों और मानवाधिकार समूहों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि उन्हें वापस चीन न भेजा जाए। उनका तर्क है कि यदि उन्हें चीन भेजा गया, तो वहां उनकी जान को गंभीर खतरा है। फिलहाल कनाडा सरकार से भी इस मामले में संपर्क किया गया है, क्योंकि डोंग का परिवार वहीं रह रहा है।

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