चीन की विदाई, भारत की एंट्री: पनामा में रॉयल एनफील्ड की धूम और बदलती वैश्विक तस्वीर
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पनामा के बाजार में इस समय एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर चीन का प्रभाव तेजी से घट रहा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय ब्रांड्स वहां अपनी जगह मजबूत कर रहे हैं। भारत की प्रमुख मोटरसाइकिल कंपनी रॉयल एनफील्ड ने पनामा में अपने तीन नए मॉडल्स लॉन्च करके लैटिन अमेरिकी बाजार में अपनी धमक बढ़ा दी है।

पनामा में भारतीय बाइक्स का जलवा भारतीय राजदूत सुमित सेठ ने पनामा में रॉयल एनफील्ड की तीन नई मोटरसाइकिलों—गोअन क्लासिक 350, हिमालयन 450 माना ब्लैक एडिशन और क्लासिक 650—को लॉन्च किया। इसे भारत की एक्सपोर्ट स्टोरी की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। पनामा की खुली अर्थव्यवस्था और डॉलर आधारित कीमतों के कारण यह कंपनी के लिए एक किफायती और आकर्षक बाजार साबित हो रहा है।

भारत-पनामा के बढ़ते मजबूत रिश्ते केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्तर पर भी दोनों देशों की नजदीकियां बढ़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन से लेकर गणतंत्र दिवस समारोह तक, पनामा और भारत ने साझा सहयोग के नए अध्याय लिखे हैं। पनामा का मानना है कि ट्रेडिशन, ट्रेड, टेक्नोलॉजी, टूरिज्म और टैलेंट (5Ts) के माध्यम से दोनों देशों के बीच भविष्य में और भी गहरे संबंध स्थापित होंगे।

रणनीतिक रूप से क्यों अहम है पनामा? मध्य अमेरिका में स्थित पनामा पनामा नहर के लिए विश्व विख्यात है। यह नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ती है, जिससे दुनिया के 5-6 प्रतिशत समुद्री व्यापार का संचालन होता है। अमेरिका की सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि पनामा पर वैश्विक शक्तियों की नजर हमेशा बनी रहती है।

चीन के लिए पनामा में बढ़े संकट पिछले कुछ वर्षों में चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के जरिए पनामा में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की थी। हालांकि, सुरक्षा चिंताओं और अमेरिकी दबाव के चलते अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। फरवरी 2025 में पनामा ने चीन की BRI परियोजना से किनारा कर लिया और हाल ही में चीनी कंपनी के बंदरगाह संचालन समझौतों को भी रद्द कर दिया गया।

चीन के प्रभाव का अंत? चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पनामा के जहाजों को हिरासत में लिया है, लेकिन पनामा ने चीन से दूरी बनाने का सख्त रुख अपना लिया है। चीन के साथ बिगड़ते संबंधों ने एक खाली जगह पैदा की है, जिसे अब भारत अपने टैलेंट और ब्रांड्स के दम पर भरने के लिए तैयार दिख रहा है। पनामा की बदलती प्राथमिकताएं इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि लैटिन अमेरिका में अब भारतीय उत्पादों पर भरोसा बढ़ता जा रहा है।

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