नेहरू के कपड़े क्या पेरिस धुलने जाते थे? इतिहासकार पुष्पेश पंत ने खोलीं अनकही परतें
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भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू अक्सर चर्चाओं के केंद्र में रहते हैं। उनकी नीतियों से लेकर निजी जीवन तक, कई सवाल आज भी जनता के बीच जिज्ञासा का विषय हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान प्रख्यात इतिहासकार पुष्पेश पंत ने नेहरू से जुड़ी इन भ्रांतियों और रहस्यों पर खुलकर बात की।

क्या पेरिस धुलने जाते थे नेहरू के कपड़े? नेहरू के बारे में यह किस्सा बेहद मशहूर रहा है कि उनके कपड़े धुलने के लिए पेरिस भेजे जाते थे। इस पर इतिहासकार ने इसे पूरी तरह मूर्खतापूर्ण करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेहरू की आत्मकथा के अनुसार, इलाहाबाद में पेरिस लॉन्ड्री नाम की एक मशहूर धुलाई की दुकान थी। नेहरू रईस थे, इसलिए उनके कपड़े वहीं धुलते थे। उन्होंने तर्क दिया कि उस दौर में हवाई यात्रा और समुद्री सफर में हफ्तों लग जाते थे, ऐसे में कपड़े पेरिस भेजना तार्किक रूप से असंभव था।

पंडित शब्द कैसे जुड़ा? नेहरू के नाम के साथ पंडित शब्द पर पंत ने कहा कि यह उन पर थोपा गया था। उनके समकालीन नेता जैसे सुभाष चंद्र बोस और सरोजनी नायडू उन्हें केवल जवाहर कहकर पुकारते थे। हालांकि, विद्वान होने के नाते या उत्तर भारतीय परंपरा में पंडित संबोधन को सम्मान के रूप में देखा गया, लेकिन उनकी अपनी पहचान चाचा नेहरू के रूप में ही सबसे अधिक रही।

राजनीति में वंशवाद और नेहरू की एंट्री अक्सर कहा जाता है कि नेहरू को राजनीति विरासत में मिली। लेकिन पुष्पेश पंत का मानना है कि उन्होंने बहुत कुछ अपने दम पर हासिल किया। वे बताते हैं कि नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू का कांग्रेस में जुड़ाव खुद जवाहरलाल के गांधी के प्रति आकर्षण की वजह से हुआ था। राजनीति में पैराशूट एंट्री का श्रेय वे इसे नहीं देते, बल्कि नेहरू के व्यक्तिगत संघर्षों और गांधी के साथ उनके वैचारिक तालमेल को मुख्य कारण मानते हैं।

एडविना माउंटबेटन के साथ रिश्ते की सच्चाई नेहरू और एडविना माउंटबेटन के रिश्तों पर छिड़ी बहस को लेकर पंत ने साफ कहा कि इसे किसी नाम की मोहताज रखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने एडविना की बेटी पामेला माउंटबेटन की किताब का जिक्र करते हुए कहा कि उनके बीच प्रेम संबंध थे और इसे छिपाया नहीं गया था। उन्होंने कहा, प्यार को प्यार रहने दें, कोई नाम न दें।

पुरखों का सच और भारत एक खोज नेहरू के पुरखों के मुसलमान होने की बातों को इतिहासकार ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पूर्वज गंगाधर कौल दिल्ली के शहर कोतवाल थे और नेहरू उपनाम कश्मीर के त्राल क्षेत्र से आया है। साथ ही, उनकी प्रसिद्ध किताब भारत एक खोज पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नेहरू वास्तव में भारत को नहीं, बल्कि खुद को तलाश रहे थे कि आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी क्या भूमिका हो सकती है।

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