आगरा से उठा विवाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का हालिया भारत दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। आगरा में अपनी पत्नी के साथ ताजमहल के सामने ली गई रुबियो की एक तस्वीर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। ईरान समर्थित सोशल मीडिया अकाउंट्स ने इस तस्वीर को आधार बनाकर अमेरिका पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।
ईरान का तीखा हमला विवाद की शुरुआत तब हुई जब ईरान इन हैदराबाद नामक हैंडल ने रुबियो की तस्वीर साझा करते हुए उन पर तंज कसा। पोस्ट में कहा गया कि यदि रुबियो को इतिहास और वास्तुकला की समझ होती, तो वे जानते कि ताजमहल ईरानी संस्कृति और फारसी कलाकारों की उत्कृष्ट कृति है। आरोप लगाया गया कि एक तरफ अमेरिकी सरकार ईरानी सभ्यता को मिटाने की धमकी देती है, तो दूसरी तरफ उसके नेता उसी सभ्यता की धरोहरों के सामने गर्व से तस्वीरें खिंचवाते हैं।
ट्रंप के पुराने बयान से कनेक्शन यह विवाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विवादास्पद बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अप्रैल में ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि आज ईरानी सभ्यता का आखिरी दिन हो सकता है। इसी बयान के संदर्भ में रुबियो की फोटो को पाखंड करार दिया जा रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
ताजमहल और ईरान का रिश्ता ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो ताजमहल का ईरान से गहरा संबंध रहा है। मुगल बादशाह शाहजहां ने इसे अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया था, जिनका परिवार मूल रूप से फारस (ईरान) से था। इस स्मारक के निर्माण में बड़ी संख्या में ईरानी वास्तुकारों और कलाकारों ने योगदान दिया था। यही कारण है कि ईरान इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।
भारत दौरे का महत्व मार्को रुबियो का यह चार दिवसीय भारत दौरा रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपनी यात्रा के दौरान वे भारत-अमेरिका के बीच ऊर्जा, रक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। नई दिल्ली में उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने पर बातचीत की है।
सोशल मीडिया पर दो फाड़ रुबियो की फोटो के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। जहां एक धड़ा ईरान के दावे का समर्थन कर रहा है कि ताजमहल में फारसी कला की भूमिका निर्विवाद है, वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे भारत की पहचान बताते हुए किसी एक देश के दावे को गलत ठहरा रहे हैं। इस विवाद ने साबित कर दिया है कि आधुनिक कूटनीति में ऐतिहासिक स्मारक अब केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पावर पॉलिटिक्स के बड़े प्रतीक बन गए हैं।
*If Rubio knew the history or architecture, he wouldn t have posed for a picture here. This monument was built out for the love of emperor s Iranian wife, crafted by the genius of Iranian architects — meanwhile his government today threatens to wipe out Iranian civilization,… pic.twitter.com/zi4CNU3u7U
— Iran In Hyderabad (@IraninHyderabad) May 25, 2026
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