कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत होता दिख रहा है। जिस शांतनिकेतन बंगले के बाहर कभी राज्य के आला अधिकारी और दिग्गज नेता हाथ जोड़कर अपनी बारी का इंतजार करते थे, आज उसी बंगले का दरवाजा पीटकर पुलिस अंदर दाखिल हुई है। यह सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती सत्ता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
पुलिस की दस्तक और बदलती तस्वीर कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आलीशान बंगले की तस्वीरें पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कोलकाता पुलिस की एक टीम ने बिना किसी संकोच के सीधे शांतनिकेतन में प्रवेश किया। ममता बनर्जी के शासनकाल में जिस घर को एक अभेद्य किला माना जाता था, वहां पुलिस की यह मौजूदगी यह बयां कर रही है कि अब रसूख का दौर बदल चुका है।
अफसरशाही के मसीहा का दौर खत्म एक वक्त था जब जिले के SP से लेकर सचिवालय के बड़े IAS अधिकारी तक अभिषेक बनर्जी के एक इशारे पर काम करते थे। पार्टी टिकट से लेकर अफसरों की पोस्टिंग तक, सब कुछ इसी आवास से तय होता था। उस समय पुलिस प्रशासन उनके सामने किसी सुरक्षा गार्ड की तरह तैनात रहता था। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल की हार के बाद, सत्ता का समीकरण पूरी तरह पलट गया है।
बुलंदी से गर्दिश में आ चुके हैं युवराज अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक उभार की कहानी अब पतन की ओर है। कोयला घोटाला, मवेशी तस्करी, शिक्षक भर्ती घोटाला और राशन घोटाला जैसे संगीन आरोपों ने उनके साम्राज्य की नींव हिला दी है। सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में आई नई सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य अब सिंडिकेट राज से मुक्त होगा। कानून का शिकंजा अब उन लोगों के इर्द-गिर्द कस रहा है, जो खुद को कानून से ऊपर समझते थे।
क्या यह बदले की राजनीति है? भाजपा सरकार और उसके समर्थकों का दावा है कि यह बदले की नहीं, बदलाव की राजनीति है। जांच एजेंसियां ED और CBI के साथ-साथ अब राज्य पुलिस भी कड़े तेवर अपना रही है। कालीघाट की इस कार्रवाई ने बंगाल की जनता को एक कड़ा संदेश दिया है कि लोकतंत्र में कोई युवराज नहीं होता और कानून के हाथ सभी तक पहुंच सकते हैं।
भविष्य पर छाए गंभीर संकट के बादल अभिषेक बनर्जी तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी की चुनावी मशीनरी के मुख्य रणनीतिकार रहे हैं। डायमंड हार्बर के राजनीतिक मॉडल से लेकर संगठन पर पकड़ तक, उनका वर्चस्व एक दौर में निर्विवाद था। लेकिन आज, उनके चारों ओर पुलिस और जांच एजेंसियों का घेरा है। सत्ता के शिखर से नीचे गिरने की यह प्रक्रिया यह तय कर रही है कि राजनीति में बुलंदी पर टिके रहना, शिखर पर पहुंचने से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। क्या यह अभिषेक के राजनीतिक करियर का अंतिम अध्याय है? फिलहाल, बंगाल की जनता यही देख रही है।
*#WATCH | Kolkata: Heavy police deployment outside the residence of TMC National General Secretary Abhishek Banerjee.
— ANI (@ANI) May 25, 2026
More details awaited. pic.twitter.com/ra2u5ocebH
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