ट्रंप की स्थिति खराब, इसलिए मोदी को मनाने रूबियो को भेजा : पाकिस्तानी एक्सपर्ट का बड़ा दावा
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का हालिया भारत दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस दौरे को लेकर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष नजम सेठी ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को भारत के साथ अपने बिगड़े रिश्तों को सुधारने की सख्त जरूरत है।

ट्रंप की कमजोरी का नतीजा? नजम सेठी का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक स्थिति इन दिनों काफी कमजोर है। इसी वजह से उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मनाने और भारत के साथ तनाव कम करने के लिए मार्को रूबियो को भेजना पड़ा। सेठी के अनुसार, अमेरिका यह समझ चुका है कि भारत दुनिया की एक बड़ी और अत्यंत महत्वपूर्ण शक्ति है, जिसे नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।

भारत ने अपमान का दिया कड़ा संदेश सेठी ने इस बात पर खास गौर किया कि रूबियो के भारत आगमन पर उन्हें रिसीव करने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर खुद नहीं पहुंचे। उन्होंने इसे भारत की ओर से अमेरिका को दिया गया एक कड़ा कूटनीतिक संदेश बताया। भारत ने प्रोटोकॉल के तहत समकक्ष प्रतिनिधि भेजने के बजाय विदेश मंत्रालय के निचले स्तर के अधिकारी को भेजा, जो यह दर्शाता है कि भारत अमेरिका के हालिया व्यवहार से खुश नहीं है।

भारत का महत्व और वैश्विक समीकरण पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था और चुनावी फंडिंग में भारतीय समुदाय का बड़ा योगदान है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन भारत के साथ रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इजरायल और अमेरिका के साथ भारत के अप्रत्यक्ष सहयोग के बावजूद अमेरिका ने कभी भारत की खुलकर तारीफ नहीं की, जबकि इजरायल ने ऐसा किया था।

रूबियो की गंभीर कूटनीति मार्को रूबियो को ट्रंप प्रशासन का एक गंभीर चेहरा माना जाता है। अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान, उन्होंने वीजा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बहुत सधा हुआ जवाब दिया। उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीयों के अमूल्य योगदान को स्वीकार किया और किसी भी प्रकार के भेदभाव से इनकार किया।

मंच से ट्रंप की गूंजती आवाज दौरे के दौरान एक दिलचस्प वाकया तब हुआ जब भारत मंडपम में कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने डोनाल्ड ट्रंप को फोन लगाया। ट्रंप ने माइक पर पीएम मोदी की जमकर तारीफ की और उन्हें अपना अच्छा दोस्त बताया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि भारत का भरोसा अमेरिका पर बना रहे। यह पूरी घटना स्पष्ट करती है कि अमेरिका अब भारत के साथ दोस्ती को और अधिक मजबूती देने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

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