क्वॉड के जरिए चीन को घेराबंदी: पेनी वांग का भारत दौरा, रणनीतिक साझेदारी पर दुनिया की नजर
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हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती एक नई ऊंचाई पर पहुँच गई है। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वांग नई दिल्ली पहुंच चुकी हैं, जहां वह क्वॉड (QUAD) विदेश मंत्रियों की बैठक और 17वें भारत-ऑस्ट्रेलिया विदेश मंत्री स्तरीय वार्ता में हिस्सा लेंगी। वांग ने अपनी यात्रा से पहले स्पष्ट कर दिया है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच का रिश्ता आज के दौर में पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

चीन पर नकेल और क्रिटिकल मिनरल्स की जंग

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में चीन का क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लीथियम और कोबाल्ट) की सप्लाई-चेन पर एकाधिकार है। ऑस्ट्रेलिया भारत के लिए इस निर्भरता को कम करने में एक बड़ा मददगार बनकर उभरा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की दादागिरी को रोकने के लिए ऑस्ट्रेलिया की भूमिका रणनीतिक रूप से अहम है। यह साझेदारी केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा की नींव भी है।

नई दिल्ली में दिग्गजों का जमावड़ा

26 मई को नई दिल्ली में होने वाली क्वॉड बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अपने समकक्षों—पेनी वांग (ऑस्ट्रेलिया), तोशिमित्सु मोटेगी (जापान) और मार्को रुबियो (अमेरिका) की मेजबानी करेंगे। इस बैठक का मुख्य केंद्र समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत और उभरती हुई प्रौद्योगिकियां हैं। इस दौरान दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

क्यों खास है यह क्वॉड बैठक?

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पूरे क्षेत्र में रणनीतिक अनिश्चितता का माहौल है। क्वॉड अब केवल एक समूह नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत के लिए एक शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने का माध्यम बन चुका है। वांग की यह यात्रा पिछले 16 दौर की वार्ताओं के एजेंडे को आगे बढ़ाएगी, जिसमें रक्षा, समुद्री सहयोग और साइबर सुरक्षा पर ठोस फैसले लिए जा सकते हैं।

द्विपक्षीय संबंधों से रणनीतिक तालमेल तक

ऑस्ट्रेलिया केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, व्यापार और रक्षा उद्योग में भी भारत के साथ अपने संबंधों को गहरा करना चाहता है। ऑस्ट्रेलिया में मौजूद भारतीय प्रवासी और छात्रों का बढ़ता नेटवर्क दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु के रूप में काम कर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पेनी वांग की यह यात्रा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच केवल औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि एक गहरे रणनीतिक तालमेल की शुरुआत है, जो चीन के बढ़ते प्रभाव के सामने एक मजबूत दीवार खड़ी करेगी।

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