भारतीय जनता पार्टी ने केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के सचिव की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय सूचना और तकनीकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी के चुनिंदा आक्रोश (Selective Outrage) पर सवाल खड़े किए हैं।
अमित मालवीय का तीखा हमला मालवीय ने शनिवार (23 मई, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का दोहरा मापदंड एक बार फिर बेनकाब हो गया है। बीजेपी नेता ने इसे सत्ता के अनुसार बदलने वाली नैतिकता करार दिया है।
पश्चिम बंगाल बनाम केरल का उदाहरण अमित मालवीय ने पश्चिम बंगाल और केरल की नियुक्तियों की तुलना की है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार ने सबसे वरिष्ठ IAS अधिकारी मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव नियुक्त किया है, जो पूरी तरह से स्थापित नियमों और सेवा परंपराओं के अनुरूप है।
इसके विपरीत, केरल में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के सचिव के रूप में 2003 बैच के अधिकारी रतन यू. केलकर की नियुक्ति की गई है। मालवीय के अनुसार, केलकर न केवल राज्य के सबसे वरिष्ठ अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पद पर भी बने रहेंगे।
संस्थागत निष्पक्षता का क्या? अमित मालवीय ने सवाल उठाया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी का पद संस्थागत निष्पक्षता और स्वतंत्रता का प्रतीक होता है। उन्होंने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए पूछा, अब राहुल गांधी की संस्थागत मर्यादा पर दी जाने वाली सीख कहां है? क्या उनका आक्रोश केवल इस बात पर निर्भर करता है कि सत्ता में कौन सी पार्टी है?
राहुल गांधी का पुराना वार बीजेपी का यह हमला राहुल गांधी के उस पोस्ट के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने लिखा था- BJP-EC के चोर बाजार में जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम। इसी तंज का जवाब देते हुए मालवीय ने राहुल गांधी को उनके ही बनाए संस्थागत मर्यादा के सिद्धांतों पर आईना दिखाया है।
फिलहाल, इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है कि क्या संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों की राजनीतिक नियुक्तियां संस्थागत निष्पक्षता के लिए खतरा हैं।
Rahul Gandhi’s selective outrage stands exposed yet again.
— Amit Malviya (@amitmalviya) May 23, 2026
He chose to criticise West Bengal Chief Minister Suvendu Adhikari for appointing Shri Manoj Agarwal as Chief Secretary. But unlike Mamata Banerjee, who repeatedly subverted the bureaucracy by superseding dozens of IAS… pic.twitter.com/Hpf7DTvU4b
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