अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में जो खटास आई थी, वह अब और गहरी होती दिख रही है। मोहम्मद यूनुस के बाद तारिक रहमान सरकार का ताजा फैसला भारत के लिए एक बड़ा संकेत है। बांग्लादेश ने अपने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को ट्रेनिंग के लिए भारत की जगह पाकिस्तान भेजना शुरू कर दिया है।
मसूरी से लाहौर तक का सफर अब तक बांग्लादेशी सिविल सर्वेंट्स की ट्रेनिंग के लिए उत्तराखंड के मसूरी स्थित ‘लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी’ (LBSNAA) पहली पसंद थी। सालों से दोनों देशों के बीच प्रशासनिक समझ और सहयोग का यह केंद्र मुख्य आधार था। लेकिन 2024 के बाद यह व्यवस्था बदल गई है। अब बांग्लादेश के 12 सीनियर अधिकारी, जिनमें 11 जॉइंट सेक्रेटरी स्तर के अफसर भी शामिल हैं, लाहौर की सिविल सर्विसेज एकेडमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
पाकिस्तान उठा रहा है ट्रेनिंग का पूरा खर्च यह महज एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि गहरे संबंधों की ओर बढ़ता कदम है। रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे तीन हफ्ते के ‘एग्जीक्यूटिव लीडरशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम’ का खर्च खुद पाकिस्तान उठा रहा है। अधिकारी न केवल लाहौर, बल्कि इस्लामाबाद और कराची के भी प्रशासनिक संस्थानों का दौरा कर रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों को दर्शाता है।
इतिहास को पीछे छोड़ती बांग्लादेश की नई नीति दिलचस्प बात यह है कि 1947 से 1971 के बीच बांग्लादेशी अधिकारी लाहौर में ही ट्रेनिंग लेते थे। 1971 में पाकिस्तान द्वारा किए गए अत्याचारों के विरोध में और भारत के सहयोग से बांग्लादेश का जन्म हुआ था। आज वही बांग्लादेश सब कुछ भुलाकर वापस पाकिस्तान की ओर रुख कर रहा है। जानकारों का मानना है कि यह बांग्लादेश की डिप्लोमैटिक फ्लेक्सिबिलिटी है, जिसके जरिए वह भारत पर अपनी निर्भरता खत्म करना चाहता है।
भारत के लिए क्या है खतरा? विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान में ट्रेनिंग लेने से बांग्लादेशी अफसरों पर वहां की प्रशासनिक कार्यशैली और भारत-विरोधी एजेंडे का प्रभाव पड़ सकता है। यदि यह प्रभाव भविष्य की प्रशासनिक नीतियों में झलकता है, तो भारत-बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों में समन्वय बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सिर्फ विकल्प या भारत से दूरी? क्या यह कदम स्थायी बदलाव है? कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश अब मल्टी-एलायंस स्ट्रैटेजी अपना रहा है, जहाँ वह भारत और पाकिस्तान दोनों से संबंध साधकर अपनी क्षमता बढ़ाना चाहता है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि दक्षिण एशिया में बदलता यह समीकरण भारत के लिए एक बड़ा रणनीतिक संकेत है। क्या यह ट्रेनिंग सिर्फ प्रशासनिक है या भविष्य में किसी बड़े सैन्य और राजनीतिक सहयोग की नींव है? यह आने वाला समय ही बताएगा।
A delegation of senior civil servants from Bangladesh visited HEC Pakistan under the Pakistan-Bangladesh Knowledge Corridor initiative as part of a three-week Executive Leadership Training Programme sponsored by HEC. pic.twitter.com/yXUh9AXnRQ
— HEC Pakistan (@hecpkofficial) May 20, 2026
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