सीबीएसई की मनमानी: लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़, हेल्पलाइन नंबर भी आउट ऑफ सर्विस
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सीबीएसई (CBSE) की ओर से 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी देखने के लिए शुरू किया गया ऑनलाइन पोर्टल छात्रों के लिए राहत के बजाय मुसीबत का सबब बन गया है। लाखों छात्र और उनके अभिभावक इस समय मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। दावा पारदर्शिता का किया गया था, लेकिन सिस्टम की खामियों ने छात्रों की मेहनत पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

तकनीकी खामियां और सवालों के घेरे में पारदर्शिता

सोशल मीडिया पर शिकायतों का अंबार लगा है। कई छात्रों का आरोप है कि आवेदन शुल्क उनके बैंक खाते से कट गया, लेकिन पोर्टल पर पेमेंट फेल दिखाई दे रहा है। वेबसाइट इतनी धीमी है कि छात्र आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए घंटों संघर्ष कर रहे हैं।

जिन छात्रों ने किसी तरह स्कैन कॉपी हासिल की, वे अब और भी बड़े सदमे में हैं। कॉपियां इतनी धुंधली हैं कि छात्र अपनी ही हैंडराइटिंग नहीं पढ़ पा रहे हैं। कई छात्रों ने शिकायत की है कि सही उत्तर लिखने के बावजूद उन्हें 0 नंबर दिए गए हैं, और कुछ भरे हुए पेजों को भी ब्लैंक (खाली) करार देकर उन पर कोई अंक नहीं दिए गए।

सभी लाइनें व्यस्त हैं : बोर्ड की चुप्पी भारी

छात्र जब मदद के लिए सीबीएसई की हेल्पलाइन पर संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। बोर्ड द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर या तो आउट ऑफ सर्विस मिल रहे हैं या फिर सभी लाइनें व्यस्त हैं का संदेश दे रहे हैं। लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है और बोर्ड का कोई जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने के लिए मौजूद नहीं है।

क्या यह तकनीकी गलती है या मूल्यांकन की बड़ी खामी?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि मूल्यांकन प्रणाली की एक गहरी खामी है। ऑन-स्क्रीन मार्किंग के दौर में ऐसी गलतियां बोर्ड की कार्यक्षमता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाती हैं। फिजिक्स हेडक्वार्टर के अनुराग त्यागी जैसे विशेषज्ञों का सुझाव है कि दोबारा परीक्षा आयोजित करने के बजाय, बोर्ड को गलती सुधारते हुए प्रभावित छात्रों को बेस मार्क्स देकर रिवाइज्ड मार्कशीट जारी करनी चाहिए।

करियर पर मंडराता खतरा

12वीं के अंकों का सीधा असर जेईई मेन और एडवांस के जरिए आईआईटी (IIT) व एनआईटी (NIT) में दाखिले पर पड़ता है। कई मेधावी छात्र, जिन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन किया है, वे केवल 12वीं में 75 फीसदी अंकों की अनिवार्यता के कारण अपनी सीट खोने के डर से जूझ रहे हैं।

सीबीएसई की यह चुप्पी और लापरवाही छात्रों के आत्मविश्वास को तोड़ रही है। अब मांग उठ रही है कि बोर्ड न केवल तकनीकी खामियों को ठीक करे, बल्कि गलत तरीके से हुई चेकिंग की निष्पक्ष जांच भी कराए। शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य छात्रों को परखना होना चाहिए, उन्हें इस तरह बेबस छोड़ना नहीं।

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