भारतीय सेना का कड़ा प्रहार: वायरल वीडियो को बताया प्रोपेगेंडा , नेताओं की चुप्पी पर उठाए सवाल
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सोशल मीडिया पर इन दिनों भारतीय सेना से जुड़ा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को लेकर सेना ने अब मोर्चा खोल दिया है। सेना ने साफ तौर पर कहा है कि कुछ पूर्व सैनिक और एक भगोड़ा जवान मिलकर जानबूझकर भारतीय सेना की छवि को धूमिल करने की साजिश रच रहे हैं।

कौन हैं वीडियो में दिखने वाले चेहरे? सेना ने स्पष्ट किया है कि वीडियो में नजर आ रहे लोगों का पूर्व रिकॉर्ड बेहद विवादित रहा है। इनमें चंदू चव्हाण, हरेंद्र यादव और पी नरेंद्र शामिल हैं, जिन्हें अनुशासनहीनता और गैर-सैनिक व्यवहार के कारण पहले ही सेना से बर्खास्त किया जा चुका है।

इसके अलावा, शंकर सिंह गुर्जर को सेना ने भगोड़ा घोषित किया है। उसके खिलाफ सैन्य और सिविल कोर्ट में गंभीर मामले विचाराधीन हैं। सेना का आरोप है कि ये लोग खुद को पीड़ित बताकर सहानुभूति बटोरने और गलत नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहे हैं।

संजय सिंह और मनोज झा के बयानों का क्या है कनेक्शन? यह विवाद तब और गहरा गया जब राजनीतिक गलियारों में इस वीडियो को सच्चाई बताकर पेश किया जाने लगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, संजय सिंह और मनोज झा जैसे नेताओं ने इन आरोपों को मुद्दा बनाने की कोशिश की।

सेना के सूत्रों का कहना है कि नेता बिना सच्चाई की पुष्टि किए इन दावों को हवा दे रहे हैं। सेना ने याद दिलाया कि सितंबर 2024 में भी ऐसे ही भ्रामक प्रोपेगेंडा के खिलाफ चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए सेना की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने का खेल अभी भी जारी है।

सेना की दो टूक: भ्रामक बातों से बचें भारतीय सेना ने आधिकारिक बयान जारी कर नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी वायरल दावे पर आँख मूंदकर भरोसा न करें। सेना का कहना है कि यह एक सुनियोजित दुष्प्रचार है, जिसका उद्देश्य देशवासियों के मन में सेना के प्रति अविश्वास पैदा करना है।

सेना ने जनता को स्पष्ट किया है कि वे ऐसे फेक नैरेटिव और सोशल मीडिया प्रोपेगेंडा का हिस्सा न बनें। किसी भी जानकारी की पुष्टि केवल सेना के आधिकारिक चैनलों से ही की जानी चाहिए।

सावधानी ही बचाव है सेना ने स्पष्ट किया है कि वे राष्ट्र विरोधी ताकतों और ऐसे लोगों के खिलाफ पूरी सतर्कता बरत रही है। सेना ने साफ चेतावनी दी है कि गलत जानकारी फैलाना न केवल अनैतिक है, बल्कि ये देश की सुरक्षा से खिलवाड़ के समान है। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे अफवाहों को आगे न बढाएं और तथ्यों की जांच जरूर करें।

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