बकरीद पर पशु वध को लेकर सियासत गर्म: शुभंकर सरकार ने शुभेंदु अधिकारी पर साधा निशाना
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कोलकाता में बकरीद के मौके पर पशु वध और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी पर तीखा हमला बोला है।

शुभंकर सरकार का तंज शुभंकर सरकार ने इस मामले में मुख्यमंत्री और शुभेंदु अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, मैं इस पर मुख्यमंत्री का नजरिया जानना चाहता हूं। बीजेपी में शामिल होने से पहले उन्होंने (शुभेंदु अधिकारी) इसका स्वाद चखा था, तो अब जो कुछ भी हो रहा है, क्या वह वाकई इतना जरूरी है? उन्होंने इसे राजनीतिक चश्मे से देखे जाने पर आपत्ति जताई है।

क्या है हाईकोर्ट का आदेश? कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह बकरीद के मद्देनजर पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 की धारा 12 के तहत मांगी गई छूट पर 24 घंटे के भीतर निर्णय ले। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह अधिनियम काफी पुराना है और अब कृषि में तकनीक का उपयोग बढ़ गया है, इसलिए धार्मिक उद्देश्यों के लिए छूट दी जानी चाहिए।

सरकार की शर्तें और विरोध राज्य और केंद्र सरकार के वकीलों ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पशुओं की उम्र और स्वास्थ्य की जांच कानूनन अनिवार्य है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के बिना पशु वध पर पूरी तरह रोक है और सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं दी जाएगी।

हुमायूं कबीर की चेतावनी विधायक हुमायूं कबीर ने सरकार को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कुर्बानी हर हाल में होगी और मुसलमान इस पर कोई समझौता नहीं करेंगे। कबीर ने शुभेंदु अधिकारी को आग से न खेलने की सलाह देते हुए कहा कि कुरान में जो लिखा है, वही होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि ईद की नमाज के लिए सरकार पर्याप्त जगह नहीं देती है, तो भविष्य में सड़कों पर होने वाली अन्य पूजाओं पर भी सवाल उठाए जाएंगे।

यह विवाद अब धार्मिक मान्यताओं और प्रशासनिक नियमों के बीच फंस गया है, जिस पर राज्य सरकार को जल्द ही अपना अंतिम रुख स्पष्ट करना होगा।

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