सड़क पर नमाज बनाम त्योहार: योगी के बयान पर गरमाई सियासत, नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद ने पूछे तीखे सवाल
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर दिए गए बयान ने देश भर में एक नई बहस छेड़ दी है। सीएम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सड़कों को प्रार्थना के लिए ब्लॉक करना स्वीकार्य नहीं है। इस मुद्दे पर अब जम्मू-कश्मीर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

सड़कें नमाज से ही नहीं, होली-दिवाली पर भी होती हैं ब्लॉक

नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने इस मामले पर दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि शरीयत में भी सड़कों को ब्लॉक करके नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं है, यह एक अलग मुद्दा है और समुदाय को इसमें आंतरिक सुधार की जरूरत है।

इसके साथ ही उन्होंने योगी सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि धर्म के नाम पर राजनीति करना गलत है। उन्होंने तर्क दिया कि सड़कें सिर्फ नमाज के कारण ही ब्लॉक नहीं होतीं, बल्कि होली और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान भी आम रास्ता बाधित होता है।

प्यार से नहीं माने, तो दूसरा तरीका अपनाएंगे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने रुख को कड़ा करते हुए कहा था कि सड़क आम नागरिकों, व्यापारियों और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं के लिए होती है। उन्होंने कहा कि अगर जगह कम है, तो नमाज शिफ्ट में पढ़ी जानी चाहिए।

योगी ने चेतावनी देते हुए कहा, अगर लोग संवाद और प्यार से नहीं मानेंगे, तो सरकार दूसरा तरीका अपनाएगी। हम सड़कों पर किसी भी तरह की अराजकता नहीं फैलने देंगे।

सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर

इस मुद्दे पर विपक्ष भी दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सीएम योगी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर जगह की कमी है और कोई सड़क पर नमाज पढ़ता है, तो इसमें दिक्कत क्या है?

वहीं, दूसरी ओर मुस्लिम समाज के एक वर्ग से योगी के बयान का समर्थन भी मिला है। उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन मुफ्ती शमून कासमी ने सीएम योगी का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने योगी को संत बताते हुए कहा कि उनका यह कदम कानून व्यवस्था और लोगों की सुविधा के नजरिए से बिल्कुल सही है।

निष्कर्ष

सड़क पर नमाज का मुद्दा अब एक बार फिर धार्मिक स्थान बनाम सार्वजनिक स्थान की बहस में तब्दील हो गया है। एक तरफ जहां सरकार इसे कानून और व्यवस्था का नाम दे रही है, वहीं विपक्ष और कुछ अन्य नेता इसे चुनिंदा कार्रवाई करार दे रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अपनी इस चेतावनी को व्यावहारिक धरातल पर कैसे लागू करती है।

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