आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में गिरती जन्म दर को थामने के लिए एक विवादास्पद फैसला लिया है। नई नीति के तहत, अब तीसरे बच्चे के जन्म पर ₹30,000 और चौथे बच्चे पर ₹40,000 का नकद इनाम दिया जाएगा। इस फैसले के बाद देश में एक नई बहस छिड़ गई है।
लेखक और टिप्पणीकार आनंद रंगनाथन ने इस नीति को तर्कहीन और विनाशकारी करार देते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। उनके अनुसार, यह कदम भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) को एक बड़ी आपदा में बदल सकता है।
1. संकीर्ण और भारत-विरोधी सोच रंगनाथन का मानना है कि राज्य को राष्ट्रीय हित से ऊपर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि हमें किसी एक राज्य की प्रजनन दर की चिंता करने के बजाय पूरे भारत की गतिशीलता पर ध्यान देना चाहिए। यह नीति भारतीय एकता के बजाय क्षेत्रीय मानसिकता को बढ़ावा देती है।
2. संसाधनों पर भारी दबाव आंध्र प्रदेश में पहले से ही कृषि योग्य भूमि का भारी संकट है। प्रति वर्ग किलोमीटर 970 लोग खेती पर निर्भर हैं। पानी की किल्लत और सूखे से जूझ रहे राज्य में आबादी बढ़ाना संसाधनों को नष्ट करने जैसा है।
3. अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती राज्य पहले से ही 36% के कर्ज-टू-जीडीपी अनुपात से जूझ रहा है। टैक्सपेयर्स का पैसा इस तरह बांटना आर्थिक तौर पर गलत है। एक बच्चे को वयस्क बनाने का खर्च सरकार द्वारा दिए जाने वाले 40 हजार रुपये से कहीं अधिक है।
4. चुनावी हथकंडा, न कि समाधान विकास, शिक्षा और महंगाई के कारण फर्टिलिटी रेट में गिरावट आई है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों का अनुभव बताता है कि वित्तीय प्रलोभन से आबादी में कोई स्थाई सुधार नहीं होता। यह सिर्फ एक अल्पकालिक चुनावी स्टंट है।
5. बेरोजगारी और सामाजिक अशांति बिना किसी ठोस रोजगार योजना के आबादी बढ़ाना यूथ बल्ज (युवाओं की भीड़) पैदा करेगा। जब संसाधन सीमित होंगे और नौकरियां कम होंगी, तो यह स्थिति अपराध और सामाजिक अशांति को जन्म देगी।
6. गुणवत्ता के ऊपर मात्रा कैश के लालच में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अधिक बच्चे पैदा करेंगे, लेकिन उन्हें अच्छा पोषण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दे पाएंगे। इससे अकुशल और कुपोषित नागरिकों की संख्या बढ़ेगी, जो भविष्य में केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहेंगे।
7. बिना UCC के विभाजन का खतरा रंगनाथन का सबसे गंभीर तर्क समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समान कानून नहीं है, तो एक व्यक्ति कई शादियों के जरिए दर्जनों बच्चे पैदा कर सकता है। इससे राज्य की जनसांख्यिकी पूरी तरह बदल सकती है, जो भविष्य में धार्मिक आधार पर देश के विभाजन का कारण बन सकती है।
आंध्र प्रदेश सरकार का तर्क है कि राज्य में प्रजनन दर 1.5 से 1.7 के बीच गिर गई है, जिसे संतुलित करना जरूरी है। वहीं, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह कदम मुख्य रूप से भविष्य में होने वाले लोकसभा परिसीमन (Delimitation) के डर से उठाया गया है। दक्षिण भारत के नेताओं को डर है कि कम आबादी के कारण संसद में उनकी सीटें कम हो सकती हैं।
फिलहाल, इस नीति ने सत्ता के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक एक गंभीर चिंता पैदा कर दी है कि क्या चंद पैसों का लालच भविष्य की एक बड़ी जनसांख्यिकीय समस्या को न्योता दे रहा है?
Andhra Pradesh’s recent decision to pay parents Rs 30,000 for their third child and Rs 40,000 for the fourth will turn India’s demographic dividend into a demographic disaster and trigger another partition.
— Anand Ranganathan (@ARanganathan72) May 19, 2026
Here I provide seven arguments why @ncbn must withdraw this policy: pic.twitter.com/UCwl12kR8S
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