ट्रम्प के दौरे के तुरंत बाद बीजिंग पहुंचे पुतिन, अमेरिका की घेराबंदी के लिए रची जा रही है नई रणनीति
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डोनाल्ड ट्रम्प के चीन दौरे के ठीक बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का बीजिंग पहुंचना वैश्विक राजनीति में हलचल मचा रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर पुतिन दो दिवसीय राजकीय दौरे पर चीन में हैं। इस साल यह पुतिन की पहली विदेश यात्रा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रणनीतिक मुद्दों पर टिकी नजरें विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रम्प का दौरा जहां औपचारिक और दिखावटी अधिक था, वहीं पुतिन का दौरा पूरी तरह से गंभीर और रणनीतिक मुद्दों पर केंद्रित है। पुतिन के एजेंडे में यूक्रेन युद्ध के समाधान और परमाणु हथियार नियंत्रण जैसे संवेदनशील विषय शामिल हैं। इसके अलावा, वह चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग को लेकर अहम बैठक करेंगे।

शी-पुतिन की महा-मीटिंग और अमेरिका को चुनौती पुतिन और जिनपिंग की यह मुलाकात अमेरिका के वैश्विक दबदबे को सीधी चुनौती देने के रूप में देखी जा रही है। वर्तमान में अमेरिका मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ संकट में उलझा हुआ है। इस स्थिति का लाभ उठाकर रूस और चीन एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की नींव रखने में जुटे हैं। बीजिंग में पुतिन का जोरदार स्वागत इस बात का संकेत है कि दोनों देश एक-दूसरे के कितने करीब हैं।

पुराने दोस्तों का मजबूत गठबंधन पुतिन का यह 25वां चीन दौरा है। दोनों नेताओं के बीच अब तक 40 से अधिक बार मुलाकातें हो चुकी हैं, जो इनकी गहरी राजनीतिक साझेदारी को दर्शाती हैं। साल 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद से शी जिनपिंग की पहली विदेश यात्रा रूस ही रही थी। यह निरंतरता साबित करती है कि दोनों देश वैश्विक मंच पर एक-दूसरे को अपना सबसे मजबूत सहयोगी मानते हैं।

ग्लोबल लीडर बनने की चीन की चाल विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि चीन एक जटिल संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ वह अमेरिका के साथ बातचीत बरकरार रख रहा है, तो दूसरी तरफ रूस के साथ अपने गठजोड़ को और मजबूत कर रहा है। चीन इस मौके का इस्तेमाल खुद को एक ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करने के लिए कर रहा है, जो अमेरिका और रूस दोनों के साथ अपने संबंधों को साध कर दुनिया की दिशा तय कर सके।

दुनिया का बॉस कौन? पुतिन की इस यात्रा के बाद निकलने वाले फैसले यह तय करेंगे कि आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की चाबी किसके हाथ में होगी। ट्रेड, एनर्जी और डिफेंस के क्षेत्र में रूस और चीन की आपसी समझ पश्चिमी देशों के प्रभाव को कम करने के लिए पर्याप्त है। आने वाले दिन यह स्पष्ट करेंगे कि क्या यह बैठक अमेरिका की बादशाहत को खत्म करने वाला टर्निंग पॉइंट साबित होगी।

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