मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा धार के भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित करने के फैसले पर मचे विवाद के बीच, ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने फैसले की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
फैसले पर सवाल और जज की भूमिका मौलाना रशीदी ने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट का यह फैसला एकतरफा है। उन्होंने दावा किया कि जिस जज ने यह फैसला सुनाया है, उनके बेटे को सरकार ने अपने पैनल में शामिल किया है। उन्होंने इस पर संदेह जताते हुए कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
एएसआई की पुरानी रिपोर्ट का हवाला रशीदी ने तर्क दिया कि साल 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने परिसर में जुमे की नमाज पढ़ने की अनुमति दी थी। उन्होंने पूछा कि क्या उस समय एएसआई में हिंदू अफसर नहीं थे? उन्होंने कहा कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के पति भी उस समय एएसआई में तैनात थे, जिनकी रिपोर्ट में इसे मस्जिद बताया गया था और मंदिर के अवशेष होने से इनकार किया गया था।
अदालत का फैसला और एएसआई का रुख हाल ही में हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानते हुए हिंदुओं को पूजा का विशेष अधिकार दिया। इसके साथ ही, अदालत ने 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की इजाजत थी। अदालत ने मुस्लिम और जैन पक्षों की चार याचिकाएं भी खारिज कर दीं।
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे मौलाना रशीदी ने साफ किया है कि मुस्लिम पक्ष हाई कोर्ट के इस निर्णय से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके पास अब सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प खुला है और वे इसे शीर्ष अदालत में चुनौती देंगे।
ओवैसी की भी तीखी प्रतिक्रिया इस पूरे मामले पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने इस फैसले को भारत के संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ करार दिया है और कहा है कि इसमें बाबरी मस्जिद मामले जैसी समानताएं नजर आती हैं।
#WATCH | Delhi | Following the MP High Court declaring Bhojshala complex a temple, All India Imam Association President, Maulana Sajid Rashidi says, Look, this verdict is a one-sided decision, and the very judge who delivered this verdict—his son was inducted into the… pic.twitter.com/WQeOaFhcoF
— ANI (@ANI) May 19, 2026
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