हम दुनिया की आबादी का छठा हिस्सा हैं, समस्याओं का नहीं , नॉर्वे में भारत का दो-टूक जवाब
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नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने भारत की छवि और मानवाधिकारों पर उठे सवालों का बेहद आक्रामक और सटीक जवाब दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नार्वेजियन समकक्ष जोनास गहर स्टोर की वार्ता के बाद एक पत्रकार के तीखे सवाल का उन्होंने कड़ा प्रतिवाद किया।

एनजीओ की रिपोर्ट पर तीखा हमला प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब एक नॉर्वेजियन पत्रकार ने भारत की विश्वसनीयता और मानवाधिकारों पर सवाल उठाया, तो सिबी जॉर्ज ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, हम दुनिया की कुल आबादी का छठा हिस्सा हैं, लेकिन हम दुनिया की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कई लोगों को भारत की विविधता और विशालता की समझ नहीं है। वे किसी अज्ञानी एनजीओ की एक-दो रिपोर्ट पढ़कर सवाल पूछने लगते हैं। हमें ऐसी बातों की कोई चिंता नहीं है, क्योंकि हमें अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पूरा गर्व है।

संविधान की दी याद सिबी जॉर्ज ने स्पष्ट किया कि भारत का संविधान अपने हर नागरिक को न्याय, समानता और अभिव्यक्ति की पूरी आजादी की गारंटी देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत सदियों से एक लोकतांत्रिक समाज रहा है और एक संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के रूप में अपने आदर्शों का पूरी तरह पालन करता है।

तीन दिन में दूसरी बार कड़ा रुख यह पिछले तीन दिनों में दूसरी बार है जब भारतीय राजनयिकों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के खिलाफ उठाए गए सवालों का मुंहतोड़ जवाब दिया है। इससे पहले, नीदरलैंड्स के द हेग में भी सिबी जॉर्ज ने डच पत्रकारों द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उठाए गए सवालों का इसी तरह ठोस जवाब दिया था।

वैश्विक साख का दिया हवाला यह पूछे जाने पर कि दुनिया भारत पर भरोसा क्यों करे, सिबी जॉर्ज ने भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने जी-20 शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन और कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन मैत्री के तहत 100 से अधिक देशों को मदद पहुंचाने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के लिए हमेशा एक विश्वसनीय और मददगार साथी रहा है।

विवाद की जड़ दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब साझा प्रेस बयान के बाद पत्रकार ने पीएम मोदी से सवाल पूछने का प्रयास किया। प्रोटोकॉल के तहत सवाल नहीं लिए जाने थे, जिस पर पत्रकार ने आपत्ति जताई। इसके बाद भारतीय दूतावास ने पत्रकार को आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग में आमंत्रित किया, जहां विदेश मंत्रालय के सचिव ने उनके सभी सवालों का विस्तार से और कड़े शब्दों में जवाब दिया।

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