सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर अपनी गाइडलाइन को और अधिक सख्त बना दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन अनिवार्य है। साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक और आक्रामक या बीमार कुत्तों को कानूनी दायरे में दया मृत्यु दिए जाने का आदेश बरकरार रखा गया है।
अदालत की नाराजगी और अधिकारियों की विफलता पूर्व सांसद और पशु कल्याण कार्यकर्ता मेनका गांधी ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि पूर्व में दिए गए एबीसी (ABC) फ्रेमवर्क और शेल्टर होम बनाने के आदेशों का पालन कहीं भी नहीं हुआ। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी पक्ष को दिक्कत है, तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। दिल्ली समेत देश के 780 जिलों में से एक में भी शेल्टर होम का निर्माण न होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
अमीर से गरीब बस्तियों में कुत्तों का डंपिंग मेनका गांधी ने एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि जो एबीसी सेंटर बनाए भी गए, वे घटिया हैं और उन्हें मनमाने तरीके से रिश्तेदारों को आवंटित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमीर कॉलोनियों से आवारा कुत्तों को उठाकर गरीब बस्तियों में छोड़ दिया जाता है। चूंकि गरीब लोग ज्यादा असुरक्षित होते हैं, इसलिए उन्हें कुत्तों के काटने का शिकार होना पड़ता है। आरडब्ल्यूए (RWA) और सोसायटियां चोरी-छिपे ये काम करवाती हैं।
भयमुक्त जीवन का अधिकार अधिवक्ता विवेक शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अनुच्छेद 21 यानी जीवन जीने के अधिकार से जोड़ा है। कोर्ट का मानना है कि बच्चे, बुजुर्ग और आम नागरिक स्कूल, अस्पताल, बस स्टॉप और एयरपोर्ट जैसी जगहों पर बिना किसी डर के जा सकें। कुत्ते के काटने की घटनाओं को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और नगर निगम की जिम्मेदारी है।
सरकारी कर्मचारियों को सुरक्षा और जवाबदेही अदालत ने अब नगर निगम और अन्य एजेंसियों के कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया है जो कुत्तों को पकड़ने या टीकाकरण के काम में लगे हैं। अब इस काम के दौरान इन कर्मचारियों पर कोई एफआईआर या कानूनी बाधा नहीं डाली जा सकेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि काम सही तरीके से लागू नहीं हुआ, तो इसकी पूरी जवाबदेही स्थानीय प्रशासन की होगी।
#WATCH दिल्ली: पशु अधिकार कार्यकर्ता और भाजपा नेता मेनका गांधी ने कहा, उन्होंने कहा है कि अब हम नहीं सुनेंगे और अगर आपको हमारे फैसले से कोई ऐतराज है तो आप हाई कोर्ट जा सकते हैं। इन्होंने पिछले ऑर्डर में बहुत सख्ती से कहा था कि स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और बस स्टॉप से आवारा… https://t.co/2LMxrNU7n1 pic.twitter.com/cw0b6eVt3F
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 19, 2026
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