सदा जवान रहने की तैयारी: सैम ऑल्टमैन का अरबों डॉलर का एजिंग रिवर्सल दांव
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ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन एक ऐसी तकनीक पर दांव लगा रहे हैं जो भविष्य में बुढ़ापे को थाम सकती है। ऑल्टमैन ने अपनी पूरी लिक्विड नेट वर्थ रेट्रो बायोसाइंसेज (Retro Biosciences) नाम की कंपनी में निवेश कर दी है। यह स्टार्टअप उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को उलटने पर काम कर रहा है।

ऑल्टमैन ने शुरुआत में इसमें 180 मिलियन डॉलर का निवेश किया था, जो बाद में बढ़कर 1 अरब डॉलर के फंडिंग राउंड तक पहुंच गया। आज इस कंपनी की वैल्यू करीब 5 अरब डॉलर आंकी गई है।

क्या है पार्शियल सेलुलर रीप्रोग्रामिंग ?

रेट्रो बायोसाइंसेज पार्शियल सेलुलर रीप्रोग्रामिंग तकनीक पर काम कर रही है। इसमें इंसानी कोशिकाओं को पूरी तरह स्टेम सेल में बदले बिना उन्हें युवा अवस्था में वापस लाया जाता है।

कंपनी का तर्क है कि कैंसर, अल्जाइमर और हृदय रोगों जैसी बीमारियां उम्र बढ़ने का नतीजा हैं। यदि कोशिकाओं को युवा बनाया जा सके, तो इन बीमारियों को होने से पहले ही रोका जा सकेगा।

AI ने बदली रिसर्च की रफ्तार

इस शोध में सबसे बड़ा बदलाव AI लेकर आया है। ओपन एआई ने इस प्रोजेक्ट के लिए GPT-4b micro नामक एक विशेष मॉडल तैयार किया। इस मॉडल ने उन प्रोटीन्स को डिजाइन किया जो कोशिका रीप्रोग्रामिंग की गति को 50 गुना अधिक प्रभावी बना देते हैं।

जो काम पहले 3 हफ्तों में होता था, वे अब मात्र 7 दिनों में पूरा हो रहा है। AI ने ऐसे प्रोटीन सुझाव दिए जिन्हें सामान्य मानव वैज्ञानिकों ने कभी सोचा भी नहीं था।

डॉक्टर्स और गुप्त रूप से बढ़ रहा ChatGPT का उपयोग

ऑल्टमैन के मुताबिक, हेल्थकेयर में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने खुलासा किया कि कई डॉक्टर निजी तौर पर मरीजों के इलाज और निदान के लिए ChatGPT का उपयोग कर रहे हैं, हालांकि अस्पतालों में आधिकारिक नीति न होने के कारण वे इसे सार्वजनिक नहीं करते।

GPT-5 को भी विशेष रूप से हेल्थकेयर के लिए अपग्रेड किया गया है, ताकि यह मेडिकल रिकॉर्ड्स और लक्षणों को बेहतर तरीके से समझ सके।

क्या हम अमरता के करीब हैं?

सैम ऑल्टमैन का मानना है कि अगले 10 वर्षों में दुनिया को आज के समय से कहीं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। जहां जेफ बेजोस और मार्क जुकरबर्ग जैसे अरबपति भी लंबी उम्र (longevity) की दौड़ में शामिल हैं, वहीं ऑल्टमैन का तरीका अलग है।

उनके पास AI की वह ताकत है जो वैज्ञानिक खोजों को इंसानी दिमाग से कहीं तेजी से अंजाम दे रही है। यदि उनकी यह तकनीक सफल होती है, तो यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा स्वास्थ्य रिवोल्यूशन साबित होगा। फिलहाल, इस बड़ी खोज के आसपास छाई चुप्पी यह दर्शाती है कि यह तकनीक दुनिया को हमेशा के लिए बदलने की क्षमता रखती है।

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