बीजिंग दौरे में ट्रंप के काफिले में दिखी रहस्यमयी SUV, अजीबोगरीब छत बनी चर्चा का विषय
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बीजिंग में डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दौरे के दौरान उनके काफिले में शामिल दो रहस्यमयी चीनी एसयूवी (SUV) ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इन गाड़ियों की अजीबोगरीब बनावट और उनकी विशालकाय छत को लेकर सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है।

क्या है इन गाड़ियों का रहस्य? काफिले में दिखी ये एसयूवी चीनी कंपनी होंगकी (Hongqi) के मॉडल्स पर आधारित थीं। इनकी सबसे बड़ी खासियत इनकी कस्टम-डिजाइन की गई ऊंची छतें थीं। ऐसी बनावट सुरक्षा प्रणालियों में पहले कभी नहीं देखी गई थी। ट्रंप के काफिले में ऐसी दो गाड़ियां थीं, जिनके अलावा शेवी सबअर्बन, लिंकन नेविगेटर और एक फोर्ड ई-सीरीज वैन भी मौजूद थी, जिनकी छतों में भी बदलाव किए गए थे।

13 मई को पहली बार हुआ खुलासा ये गाड़ियां 13 मई को तब चर्चा में आईं जब बीजिंग की सड़कों पर ट्रंप का काफिला गुजर रहा था। हालांकि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने इन गाड़ियों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन्हें सीक्रेट सर्विस के एजेंट नहीं चला रहे थे, लेकिन यह भी नहीं बताया कि ये गाड़ियां अमेरिकी दूतावास की थीं या चीनी सरकार की।

क्या ये इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का हिस्सा हैं? सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन गाड़ियों की ऊंची छत का इस्तेमाल भारी-भरकम उपकरणों को ले जाने के लिए किया जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इन गाड़ियों में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम , डायरेक्टेड एनर्जी वेपन या उच्च क्षमता वाले कम्युनिकेशन सिस्टम लगे हो सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल वीआईपी काफिलों को ड्रोन हमलों से बचाने के लिए ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल आम हो गया है। ऊंची छत का मतलब यह भी हो सकता है कि इसके अंदर खड़े होकर सुरक्षाकर्मी आसमान में किसी भी संभावित खतरे पर पैनी नजर रख सकें।

नंबर प्लेट से खुला एक और राज इन गाड़ियों पर लगी नंबर प्लेट्स भी रहस्य बनी हुई हैं। शेवी सबअर्बन जैसी कुछ गाड़ियों पर काली प्लेट्स लगी थीं, जो आमतौर पर बीजिंग स्थित विदेशी दूतावासों के वाहनों को दी जाती हैं। हालांकि, इन पर कोई विशिष्ट डिप्लोमैटिक मार्क न होना इसे और अधिक संदिग्ध बनाता है।

फिलहाल सीक्रेट सर्विस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। यह काफिला अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के जटिल तंत्र का एक हिस्सा मात्र था या चीन की ओर से मुहैया कराई गई कोई विशेष सुरक्षा तकनीक, यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है।

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