जहां पीएम मोदी भी नहीं पहुंच पाए, वहां ट्रंप को ले गए शी: क्या है चीन का रहस्यमयी झोंगनानहाई ?
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के आखिरी दिन एक ऐसी घटना हुई जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल मचा दी। शी जिनपिंग ने ट्रंप को झोंगनानहाई (Zhongnanhai) के उस परिसर में आमंत्रित किया, जहाँ तक पहुंचना किसी भी सामान्य विदेशी नेता के लिए लगभग असंभव है।

आखिर क्या है झोंगनानहाई? बीजिंग की मशहूर फॉरबिडन सिटी के ठीक बगल में स्थित झोंगनानहाई चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का असली पावर सेंटर है। यह वही जगह है जहाँ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत देश के शीर्ष नेतृत्व का आवास और कार्यालय है। इसे चीन का व्हाइट हाउस या क्रेमलिन कहा जा सकता है।

भारत के लिए क्यों है यह चर्चा का विषय? दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक पांच बार चीन की यात्रा कर चुके हैं, लेकिन उन्हें कभी भी इस अत्यंत गोपनीय परिसर में नहीं ले जाया गया। यही कारण है कि ट्रंप को यहाँ का निमंत्रण देना चीन की ओर से एक बड़ा कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।

सुरक्षा का अभेद्य किला झोंगनानहाई चारों तरफ से ऊंची लाल दीवारों से घिरा है। यहाँ की सुरक्षा इतनी कड़ी है कि इंटरनेट पर भी इसके अंदर की तस्वीरें और सटीक नक्शे न के बराबर उपलब्ध हैं। परिसर की सुरक्षा के लिए एक विशेष आर्मी यूनिट तैनात रहती है, जिसका एकमात्र उद्देश्य चीन के शीर्ष नेताओं की सुरक्षा करना है।

शी और ट्रंप की अनौपचारिक मुलाकात दौरे के दौरान शी जिनपिंग ने खुद ट्रंप को परिसर के सुंदर बगीचों की सैर कराई। दोनों नेताओं ने साथ घूमते हुए चाय पी और लंच पर चर्चा की। रिपोर्ट्स के अनुसार, बगीचे में गुलाबों को देखकर शी जिनपिंग ने ट्रंप को उनके बीज भेजने का वादा भी किया।

चीन ने इसे दोस्ती का नाम दिया चीनी अधिकारियों का कहना है कि यह निमंत्रण आपसी सम्मान का प्रतीक है। दरअसल, 2017 में जब ट्रंप ने फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो एस्टेट में शी जिनपिंग की मेजबानी की थी, उसी का शिष्टाचार निभाने के लिए ट्रंप को यह खास निमंत्रण दिया गया था।

इतिहास की गवाह है यह जगह शी जिनपिंग ने ट्रंप को बताया कि झोंगनानहाई महज एक दफ्तर नहीं है, बल्कि चीन के आधुनिक इतिहास का गवाह है। 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना के बाद से माओ जेडोंग से लेकर देंग शियाओपिंग और हू जिंताओ तक, चीन के सभी बड़े नेता यहीं रहे हैं। ट्रंप की इस परिसर में मौजूदगी चीन की ओर से दुनिया को दिया गया एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश है।

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