भोजशाला: दशकों के संघर्ष के बाद गूंजे मंत्र, कोर्ट ने अयोध्या फैसले को बनाया आधार
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मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस स्थल को देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र माना है। इस फैसले के बाद परिसर में भक्तों का तांता लग गया है और वर्षों बाद वहां बिना किसी प्रतिबंध के पूजा-अर्चना शुरू हो गई है।

भक्तों में खुशी की लहर भोजशाला में पूजा करने पहुंचे एक भक्त ने कहा, सालों बाद हमें बिना किसी रुकावट के दर्शन का सौभाग्य मिला है। यह अदालत का एक अदभुत फैसला है। भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक कुमार जैन ने भावुक होते हुए कहा कि आज की खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। उन्होंने उन लोगों को याद किया जिन्होंने इस संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति दी।

सनातन संस्कृति की बड़ी जीत भोजशाला मुक्ति यज्ञ के समन्वयक गोपाल शर्मा ने इसे पूरे हिंदू समाज की जीत बताया। उन्होंने कहा, पिछले 720 वर्षों से हिंदू समुदाय अपमान का घूंट पी रहा था। यह फैसला संघर्ष का एक बड़ा पड़ाव है। हमारा लक्ष्य तब तक पूरा नहीं होगा, जब तक भोजशाला को राजा भोज के समय वाला गौरवपूर्ण स्वरूप वापस नहीं मिल जाता।

अयोध्या फैसले के सिद्धांतों से मिली राह हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में अयोध्या मामले के कानूनी सिद्धांतों का विशेष रूप से उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व संबंधी मामलों में केवल एक साक्ष्य नहीं, बल्कि बहु-विषयक व्याख्या (Multidisciplinary interpretation) की आवश्यकता होती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने एएसआई (ASI) के निष्कर्षों के साथ-साथ ऐतिहासिक और साहित्यिक साक्ष्यों का गहराई से अध्ययन किया है।

राजा भोज और ऐतिहासिक साक्ष्य अदालत ने ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर यह माना कि यह स्थल परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित था। परिसर को प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल अधिनियम के तहत संरक्षित माना गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस पूरे स्थल के रखरखाव, संरक्षण और प्रबंधन का जिम्मा अब एएसआई के पास ही रहेगा।

ASI का 2003 वाला आदेश रद्द कोर्ट ने अपने फैसले में एएसआई के विवादास्पद 2003 के आदेश को निरस्त कर दिया है। उस आदेश के तहत हिंदुओं को केवल मंगलवार को पूजा और मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति थी। अब कोर्ट ने केंद्र सरकार और एएसआई को निर्देश दिया है कि वे इस स्थल का प्रबंधन एक मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र के रूप में सुनिश्चित करें। साथ ही, धार जिले में मस्जिद के निर्माण के लिए एक वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया गया है।

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