संडे को रहेगा डिजिटल कर्फ्यू : ओला-उबर से स्विगी-जोमैटो तक सब रहेगा ठप, जानें क्या है वजह
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इस रविवार, 17 मई को अगर आप बाहर जाने या घर पर खाना मंगवाने की योजना बना रहे हैं, तो रुक जाइए। आपकी ये योजना अधूरी रह सकती है क्योंकि देश भर के गिग वर्कर्स ने 5 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है।

क्या-क्या सेवाएं होंगी प्रभावित? अगले रविवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक ऐप-आधारित सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी। इसमें ओला, उबर और रैपिडो जैसी कैब सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा स्विगी, जोमैटो, जेप्टो और ब्लिंकिट जैसे फूड और ग्रोसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर भी ताला लगा रहेगा। अमेजन-फ्लिपकार्ट से सामान मंगवाने वाले ग्राहकों को भी डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ सकता है।

हड़ताल के पीछे की मुख्य वजह देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में करीब 4 साल बाद हुई भारी बढ़ोतरी ने गिग वर्कर्स की कमर तोड़ दी है। ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण इन वर्कर्स की लागत बढ़ गई है, लेकिन डिलीवरी या राइड का किराया वही पुराना है। यूनियन का कहना है कि वे अब इस आर्थिक बोझ को उठाने में असमर्थ हैं।

आर्थिक संकट और गिरती कमाई ईंधन महंगा होने से क्लाउड किचन और रेस्तरां की संख्या कम हुई है, जिससे फूड डिलीवरी ऑर्डर्स में 50 से 70 फीसदी तक की गिरावट आई है। यह उन डिलीवरी पार्टनर्स के लिए घातक है जिनकी पूरी कमाई इंसेंटिव पर टिकी होती है। फिलहाल, महंगाई और भीषण गर्मी के बीच काम करना उनके लिए मुनाफे का सौदा नहीं रह गया है।

यूनियन की सरकार और कंपनियों से बड़ी मांग गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें अब केवल वादे नहीं, ठोस समाधान चाहिए। यूनियन की अध्यक्ष सीमा सिंह ने सरकार और डिजिटल कंपनियों से मांग की है कि वर्कर्स के लिए प्रति किलोमीटर न्यूनतम 20 रुपये का सर्विस रेट तय किया जाए।

गिग इकोनॉमी पर मंडराता खतरा यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि ईंधन की कीमतों के अनुपात में कमाई नहीं बढ़ाई गई, तो लाखों वर्कर्स इस सेक्टर को छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे। नीति आयोग के अनुसार, जहां 2029-30 तक गिग वर्कर्स की संख्या 2.3 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, वहीं मौजूदा हालात इस तेजी से बढ़ते सेक्टर के भविष्य पर बड़ा सवालिया निशान लगा रहे हैं।

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