विकास-1, विकास-2 और विकास-3: नीट पेपर लीक के आरोपियों की काली कमाई का कॉलोनी कनेक्शन आया सामने
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नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच अब एक नए और चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गई है। जांच एजेंसी मुख्य आरोपियों, दिनेश और मांगीलाल बिवाल के वित्तीय साम्राज्य की गहरी पड़ताल कर रही है। अब तक की जांच में यह साफ हो गया है कि आरोपियों ने पेपर लीक से जुटाई गई अवैध संपत्ति को ठिकाने लगाने के लिए रियल एस्टेट का सहारा लिया था।

बेटे के नाम पर खड़ी की विकास कॉलोनियां जांच में खुलासा हुआ है कि मांगीलाल बिवाल ने अपने बेटे विकास के नाम पर जमवारामगढ़ इलाके में बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदी थीं। इन जमीनों पर उसने विकास नगर फर्स्ट , विकास नगर सेकंड और विकास नगर थर्ड नाम से कॉलोनियां काटीं। सीबीआई का शक है कि इन कॉलोनियों को बसाने में जो पैसा लगाया गया, वह असल में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक से आई ब्लैक मनी थी।

छापेमारी में अहम दस्तावेज बरामद गुरुवार को सीबीआई ने आरोपियों के जमवारामगढ़ स्थित पैतृक मकान और आलीशान फार्म हाउस पर एक साथ छापेमारी की। घंटों चली इस कार्रवाई में एजेंसी ने पेपर लीक से जुड़े संदिग्ध दस्तावेजों के साथ-साथ परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और प्रॉपर्टी के लेन-देन से जुड़े कई अहम कागजात जब्त किए हैं। सीबीआई अब इन वित्तीय दस्तावेजों का मिलान पेपर लीक की घटनाओं से कर रही है।

8 साल में बदली किस्मत, गांव वाले भी हैरान आरोपियों की अचानक बढ़ी अमीरी गांव वालों के लिए भी चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, महज सात-आठ साल पहले तक यह परिवार बेहद साधारण जीवन व्यतीत करता था। लेकिन पिछले 5 वर्षों में इनकी जीवनशैली में आया बदलाव चौंकाने वाला है। एक साधारण घर से आलीशान फार्म हाउस, महंगी गाड़ियां और परिवार के सदस्यों का मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचना—सब कुछ किसी फिल्म की कहानी जैसा लगता है।

प्रॉपर्टी का कवर या मनी लॉन्ड्रिंग का जाल? ग्रामीणों का कहना है कि जब भी उन्होंने परिवार की अचानक बढ़ी संपत्ति पर सवाल उठाए, तो उन्हें हमेशा प्रॉपर्टी के कारोबार में भारी मुनाफे का तर्क दिया गया। हालांकि, सीबीआई अब इसे महज एक कवर मान रही है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कॉलोनियों के विकास में और किन लोगों ने निवेश किया है, और क्या इसके पीछे किसी बड़े सफेदपोश गिरोह का हाथ है?

फिलहाल, सीबीआई की टीम उन सभी संपत्तियों और लेनदेन का ब्योरा जुटा रही है, जिन्हें आरोपियों ने पिछले कुछ सालों में खड़ा किया था। इस खुलासे के बाद नीट घोटाले की जड़ें और गहरी होने की संभावना बढ़ गई है।

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