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बीजिंग: राजनीति में एक पुरानी कहावत है— जैसी करनी, वैसी भरनी। फिलहाल यह डोनाल्ड ट्रंप पर पूरी तरह फिट बैठती है। जो ट्रंप दुनिया के मंच पर अपने सिग्नेचर अंदाज और धौंस के लिए जाने जाते थे, आज वही चीन की राजधानी बीजिंग में पिछले 26 घंटों से लगातार अपमान और प्रोटोकॉल की मार झेल रहे हैं। शी जिनपिंग ने ट्रंप को दुनिया के सामने छोटा साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
चीन ने ट्रंप के उतरते ही अपने इरादे साफ कर दिए थे। जब ट्रंप का विमान एयरफोर्स वन बीजिंग हवाई अड्डे पर उतरा, तो पास ही खड़ा एक चीनी सैनिक रोबोट की तरह बिल्कुल स्थिर था। विमान के शोर और दबाव के बावजूद सैनिक का न हिलना, बीजिंग का एक कड़ा संदेश था— यहाँ नियम हमारे चलेंगे। इतना ही नहीं, ट्रंप के स्वागत के लिए खुद शी जिनपिंग नहीं, बल्कि उपराष्ट्रपति हान झेंग पहुंचे, जो एक बड़ा कूटनीतिक अपमान माना गया।
ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में ट्रंप और जिनपिंग के बीच हुई हैंडशेक बैटल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। ट्रंप की आदत है सामने वाले को अपनी ओर खींचकर अपना वर्चस्व जताना, लेकिन जिनपिंग टस से मस नहीं हुए। उलटे, शी जिनपिंग ने अपनी बॉडी लैंग्वेज से ट्रंप को बैकफुट पर धकेल दिया। ग्लोबल एक्सपर्ट्स इस कूटनीतिक टक्कर में जिनपिंग को विजेता मान रहे हैं।
बीजिंग पहुंचते ही ट्रंप की पूरी टीम पर एक अघोषित डिजिटल लॉकडाउन लागू कर दिया गया। अमेरिकी अधिकारियों को उनके पर्सनल फोन और लैपटॉप इस्तेमाल करने से रोक दिया गया। उन्हें चेतावनी दी गई कि वे किसी भी लोकल वाई-फाई या यूएसबी पोर्ट का इस्तेमाल न करें। यह चीन द्वारा अमेरिकी डेटा की जासूसी के डर के कारण किया गया। यह पहली बार है जब अमेरिकी राष्ट्रपति को अपने ही दौरे पर इस तरह की सख्त पाबंदी झेलनी पड़ रही है।
सबसे चौंकाने वाला मोड़ ताइवान के मुद्दे पर दिखा। कभी चीन के खिलाफ ताइवान को हथियार देने की वकालत करने वाले ट्रंप ने बीजिंग में ताइवान का नाम तक नहीं लिया। जब पत्रकारों ने सवाल पूछा, तो ट्रंप ने उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। ऐसा लगता है कि जिनपिंग की चेतावनी के बाद ट्रंप ताइवान के मुद्दे पर पूरी तरह पीछे हट गए हैं, ताकि चीन को नाराज न किया जाए।
ट्रंप का यह बदला हुआ व्यवहार मजबूरी से प्रेरित है। आज अमेरिका आंतरिक रूप से कई मोर्चों पर जूझ रहा है:
ट्रंप को लगता है कि शी जिनपिंग ही ईरान पर दबाव डालकर और व्यापारिक सौदे करके उन्हें इस सियासी संकट से उबार सकते हैं। भले ही बीजिंग में ट्रंप को नीचा देखना पड़ रहा हो, लेकिन इस यात्रा से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक संकेत मिले हैं। सेंसेक्स में 790 अंकों की उछाल और व्यापारिक समझौतों की उम्मीद ने निवेशकों को राहत दी है। देखना यह है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच यह अजीब चुप्पी और समझौते की कोशिश भविष्य में क्या रंग लाती है।
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— Zee News (@ZeeNews) May 14, 2026
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