शाहिद अफरीदी को मिला पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान, हिलाल-ए-इम्तियाज से नवाजे गए लाला
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पाकिस्तान के दिग्गज ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी को क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान हिलाल-ए-इम्तियाज से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति भवन ऐवान-ए-सद्र में आयोजित एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

इस उपलब्धि के साथ ही अफरीदी इमरान खान, वसीम अकरम और वकार यूनिस जैसे दिग्गजों की फेहरिस्त में शामिल हो गए हैं। यह मुकाम हासिल करने वाले वह पाकिस्तान के चौथे क्रिकेटर बन गए हैं।

भावुक अफरीदी ने सम्मान शहीदों को समर्पित किया

सम्मान मिलने के बाद शाहिद अफरीदी ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने इसे केवल अपनी जीत नहीं, बल्कि पूरे पाकिस्तान की जीत बताया। अफरीदी ने भावुक होते हुए कहा कि यह पुरस्कार उन्हें मिले जनता के प्यार और प्रार्थनाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने इस सम्मान को देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले शहीदों को समर्पित किया।

जब 37 गेंदों में मचा था कोहराम

अफरीदी का करियर किसी फिल्म की कहानी जैसा रहा है। साल 1996 में केन्या के खिलाफ डेब्यू मैच में उन्हें न बल्लेबाजी का मौका मिला और न ही कोई विकेट। लेकिन, सिर्फ दो दिन बाद श्रीलंका के खिलाफ मैच में उन्होंने इतिहास रच दिया।

महज 16 साल की उम्र में तीसरे नंबर पर उतरे अफरीदी ने 37 गेंदों में शतक जड़कर दुनिया को चौंका दिया। 11 छक्कों और 6 चौकों से सजी उस पारी ने उन्हें रातों-रात वैश्विक स्टार बना दिया। टी20 के दौर के आने से बहुत पहले, वनडे क्रिकेट में यह कारनामा क्रिकेट जगत के लिए एक चमत्कार जैसा था।

शानदार करियर के दमदार आंकड़े

लगभग 19 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में अफरीदी ने 500 से अधिक मैच खेले। उनके आंकड़े उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण हैं:

केवल खिलाड़ी नहीं, क्राउड पुलर थे अफरीदी

शाहिद अफरीदी का प्रभाव केवल मैदान के आंकड़ों तक सीमित नहीं था। वे एक ऐसे क्राउड पुलर थे, जिनके क्रीज पर आते ही स्टेडियम का शोर दोगुना हो जाता था। 1996 से 2015 तक के अपने सफर में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे, कप्तानी संभाली और विवादों का भी सामना किया, लेकिन उनका खेल के प्रति जुनून कभी कम नहीं हुआ।

आज 46 वर्ष की आयु में मिला यह सम्मान उनके उस संघर्ष और जुनून को सलाम है, जिसने पाकिस्तान क्रिकेट को वैश्विक पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। अपने प्रशंसकों के लिए लाला आज भी एक प्रेरणा बने हुए हैं।

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