वैश्विक संकटों के बीच स्थिरता की धुरी बनेगा ब्रिक्स: एस. जयशंकर
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नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच संगठन की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि आज बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में ब्रिक्स एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभर रहा है।

80 से अधिक बैठकों से मजबूत हुआ सहयोग डॉ. जयशंकर ने जानकारी दी कि भारत की अध्यक्षता में अब तक 80 से अधिक ब्रिक्स बैठकों का आयोजन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इन बैठकों के जरिए ब्रिक्स को अधिक समावेशी और सहयोगात्मक मंच बनाने के प्रयास जारी हैं। विभिन्न सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी ने इस संवाद को नई गति प्रदान की है।

नए सदस्यों के लिए स्पष्ट संदेश संगठन के विस्तार पर चर्चा करते हुए विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स के संस्थागत विकास के लिए नए सदस्य देशों का एकीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर दिया कि नए सदस्यों को समूह द्वारा पहले से तय सामूहिक सहमति और सिद्धांतों को न केवल समझना चाहिए, बल्कि उनका सक्रिय रूप से समर्थन भी करना चाहिए।

वैश्विक चुनौतियों का सामना डॉ. जयशंकर ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर चिंता जताते हुए कहा कि युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की निगाहें ब्रिक्स पर टिकी हैं कि वह इन कठिन परिस्थितियों में एक सकारात्मक और स्थिर भूमिका निभाए।

खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर बैठक में भारत ने ऊर्जा, खाद्य, उर्वरक और स्वास्थ्य सुरक्षा को ब्रिक्स के एजेंडे में प्राथमिकता देने की बात कही। जयशंकर ने कहा कि विकासशील देशों को वित्त तक पहुंच और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की सख्त आवश्यकता है। इसके लिए विविध बाजारों का निर्माण करना समय की मांग है।

आतंकवाद और तकनीक पर कड़ा रुख विदेश मंत्री ने आतंकवाद को वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए ब्रिक्स देशों से इसके खिलाफ आपसी समन्वय बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति का उपयोग सुशासन और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए।

जलवायु न्याय की वकालत जलवायु परिवर्तन पर बात करते हुए भारत ने समान लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों (Common but Differentiated Responsibilities) के सिद्धांत को दोहराया। डॉ. जयशंकर ने कहा कि सतत विकास की प्रक्रिया में समानता का सम्मान करना आवश्यक है, ताकि किसी भी देश पर इसका अनुचित बोझ न पड़े।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ब्रिक्स ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज को मुखर करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में एक निर्णायक मंच के रूप में अपनी जगह बना रहा है।

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