अब भारत में ही होगा राफेल की MICA मिसाइलों का इलाज , फ्रांस के साथ ऐतिहासिक करार
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भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को एक बड़ी मजबूती मिली है। अब फ्रांस के अत्याधुनिक राफेल और मिराज-2000 विमानों में इस्तेमाल होने वाली MICA मिसाइलों की मरम्मत और रख-रखाव के लिए भारत को फ्रांस पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। फ्रांसीसी कंपनी MBDA ने भारतीय वायुसेना के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है, जिसके तहत भारत में ही MICA मिसाइलों का मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सेंटर स्थापित किया जाएगा।

तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम इस करार के तहत, भारत में MICA मिसाइलों के आधुनिकीकरण और मरम्मत की स्वदेशी क्षमता तैयार की जाएगी। फ्रांस की कंपनी MBDA न केवल भारत को जरूरी कलपुर्जे उपलब्ध कराएगी, बल्कि तकनीकी डेटा साझा करने के साथ-साथ भारतीय कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी देगी।

आपको बता दें कि मिसाइलें लॉन्च होने के बाद नष्ट हो जाती हैं, इसलिए मरम्मत का अर्थ उनकी भंडारण अवधि (storage life) बढ़ाना और सर्विसिंग करना है। इस केंद्र के आने से मिसाइलों की फिटनेस और उनकी युद्धक तत्परता सुनिश्चित होगी।

युद्ध के समय बढ़ेगी फुर्ती स्थानीय स्तर पर मरम्मत की सुविधा होने से अब विदेशी शिपिंग और निर्यात संबंधी जटिलताओं में फंसने का डर खत्म हो जाएगा। इससे वायुसेना का मिसाइल भंडार हमेशा भरा रहेगा और किसी भी आपातकालीन स्थिति में फौरन हथियार उपलब्ध हो सकेंगे। यह निर्णय ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के बाद लिया गया है, जिसने भारतीय वायुसेना की युद्धक तैयारियों और हथियारों के बैकअप की अहमियत को रेखांकित किया था।

क्या है MICA मिसाइल की खासियत? MICA (Missile d Interception, de Combat et d Auto-défense) एक अत्याधुनिक दागो और भूल जाओ (Fire and Forget) मिसाइल प्रणाली है। यह मिसाइल दो वैरिएंट्स में आती है:

यह मिसाइल मैक 4 (ध्वनि की गति से चार गुना तेज) की रफ्तार से 60-80 किमी दूर तक के लक्ष्य को भेद सकती है। 12 किलोग्राम के शक्तिशाली वॉरहेड से लैस यह मिसाइल हवा में किसी भी दुश्मन को नेस्तनाबूद करने में सक्षम है।

समय का महत्व और आत्मनिर्भर भारत यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब भारत राफेल विमानों के बेड़े को और बढ़ाने पर विचार कर रहा है। 1999 के कारगिल युद्ध के बाद से ही भारत ने अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण की जो प्रक्रिया शुरू की थी, यह करार उसी सफर का एक पड़ाव है। विदेशी निर्भरता खत्म होने से न केवल कीमती विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भारत का आत्मनिर्भर होने का सपना भी साकार होगा।

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