अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की संदिग्ध भूमिका का बड़ा खुलासा हुआ है। एक ओर इस्लामाबाद दुनिया के सामने शांतिदूत बनने का नाटक कर रहा था, वहीं दूसरी ओर उसने चुपके से ईरान को अपने सैन्य संसाधनों को बचाने में मदद की।
नूर खान एयरबेस बना ईरानी विमानों का सेफ हाउस रिपोर्ट्स के अनुसार, जब अमेरिका ने सीजफायर का ऐलान किया, ठीक उसी समय ईरान ने अपने कीमती सैन्य विमानों को पाकिस्तान भेज दिया। इनमें ईरानी वायुसेना का अत्याधुनिक RC-130 टोही विमान भी शामिल था।
इन विमानों को रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर रखा गया। जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान ने इन विमानों को घनी आबादी वाले इलाके में छिपाया ताकि अमेरिका वहां स्ट्राइक करने से कतराए। ईरान ने अपने बेड़े को अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए पाकिस्तान को एक ढाल के रूप में इस्तेमाल किया।
अमेरिकी सीनेटर की सख्त चेतावनी इस खुलासे ने वाशिंगटन में हड़कंप मचा दिया है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि यह रिपोर्ट सच है, तो पाकिस्तान की मध्यस्थ के तौर पर भूमिका का नए सिरे से मूल्यांकन करना होगा।
ग्राहम ने कहा कि पाकिस्तानी रक्षा अधिकारियों के पहले के बयानों को देखते हुए उन्हें इस धोखे पर कोई हैरानी नहीं है। यह घटनाक्रम आने वाले समय में पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों के लिए बड़े संकट का संकेत है।
पाकिस्तान और तालिबान का इनकार आरोपों के घेरे में आने के बाद पाकिस्तान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का तर्क है कि नूर खान एयरबेस घनी आबादी के बीच स्थित है, जहां किसी भी सैन्य विमान को छिपाकर रखना तकनीकी रूप से असंभव है।
वहीं, अफगानिस्तान के रास्ते ईरानी विमानों के पहुंचने की खबरों को तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने भी सिरे से नकार दिया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां अभी भी इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।
दो नावों की सवारी पड़ सकती है भारी राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस संकट के दौरान डर्टी बैलेंसिंग एक्ट कर रहा है। पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका से आर्थिक मदद चाहते हुए संबंध बचाना चाहता है, तो दूसरी तरफ चीन और ईरान को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता।
चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है, जबकि ईरान के साथ उसके महत्वपूर्ण ऊर्जा हित जुड़े हैं। अपनी इस दोहरी नीति के चलते पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक अविश्वसनीय सहयोगी के रूप में सामने आया है।
United States Senator Lindsey Graham tweets, If this reporting is accurate, it would require a complete reevaluation of the role Pakistan is playing as mediator between Iran, the United States and other parties. Given some of the prior statements by Pakistani defense officials… pic.twitter.com/j3xVWtu3o8
— ANI (@ANI) May 11, 2026
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