मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट की आहट पैदा कर दी है। कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर मंडराते खतरे के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। प्रधानमंत्री ने ईंधन बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल मीटिंग्स जैसे सुझाव दिए हैं, लेकिन क्या इतने भर से भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो सकती हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए हमें मेगा पाइपलाइन योजनाओं पर तेजी से काम करने की जरूरत है।
यह भारत की सबसे महत्वाकांक्षी योजना है। 1,600 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन ओमान के रास अल जीफान से गुजरात के पोरबंदर तक समुद्र के अंदर 3,500 मीटर की गहराई में बिछाई जानी है।
इस प्रोजेक्ट की खूबी यह है कि यह किसी भी तीसरे देश की सीमा को छुए बिना गैस भारत तक पहुंचाएगी। यह न केवल युद्ध के खतरों से सुरक्षित है, बल्कि एलएनजी (LNG) की तुलना में 2-3 डॉलर प्रति यूनिट सस्ती गैस भी मुहैया कराएगी। यह दशकों से फाइलों में दबी योजना अब भारत के लिए सामरिक प्राथमिकता बन गई है।
हाल ही में भारत, श्रीलंका और यूएई के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ा है। यह योजना तमिलनाडु के नागपट्टिनम को श्रीलंका के त्रिंकोमाली टैंक फार्म से जोड़ेगी।
त्रिंकोमाली बंदरगाह को भारत के लिए ईंधन भंडारण के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यूएई का निवेश इस प्रोजेक्ट को आर्थिक और तकनीकी बल दे रहा है। इससे न केवल भारत के पास संकट के समय ईंधन का एक सुरक्षित रिजर्व होगा, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक संबंध भी मजबूत होंगे।
तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (TAPI) पाइपलाइन 1,814 किलोमीटर लंबी एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य मध्य एशिया की गैस को दक्षिण एशिया तक लाना है।
हालांकि, साल 2026 तक यह पाइपलाइन अफगानिस्तान के हेरात तक पहुंचने की उम्मीद है, लेकिन भारत के लिए सबसे बड़ा रोड़ा पाकिस्तान के साथ ट्रस्ट डेफिसिट है। अगर भविष्य में भू-राजनीतिक समीकरण बदलते हैं, तो यह पाइपलाइन भारत के लिए गैस का एक बड़ा और सस्ता स्रोत साबित हो सकती है।
वर्क फ्रॉम होम जैसे प्रयास तुरंत तेल की खपत कम करने में तो मददगार हैं, लेकिन ये कोई स्थायी समाधान नहीं हैं। भारत अपनी जरूरत का 85-90% कच्चा तेल आयात करता है, जिसके लिए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में बड़े बदलाव जरूरी हैं।
ओमान और श्रीलंका के साथ पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स को जल्द पूरा करना सरकार की प्राथमिकता हो सकती है। यही वे रास्ते हैं जो मिडिल ईस्ट के तनाव के बावजूद भारत की विकास दर की रफ्तार को थमने नहीं देंगे।
Talks on the 1,600 km Oman India deep-water pipeline project (OIDMPP) have been on since the 1990s.
— Sandeep (@SandeepUnnithan) May 11, 2026
Ras Al Jifan to Porbandar. Laid on the seabed 3500 m below.
Time to ‘step on the gas’ with this project. pic.twitter.com/dO5aL1kXIE
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